जोहान्सबर्ग का सोने का खजाना: विटवाटरस्रैंड बेसिन ने कैसे बदली दक्षिण अफ्रीका की किस्मत?

जोहान्सबर्ग का सोने का खजाना: विटवाटरस्रैंड बेसिन ने कैसे बदली दक्षिण अफ्रीका की किस्मत?

पीएम नरेंद्र मोदी इन दिनों जी-20 समिट में शामिल होने के लिए दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर हैं. जोहान्सबर्ग में आयोजित इस समिट के लिए पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ. वे वहां रहने वाले भारतीयों से भी मिले. कई अन्य वैश्विक लीडर्स से भी उनकी मुलाकात हुई. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के महत्व पर तो प्रकाश डाला ही, आर्थिक सहयोग, औद्योगिकीकरण, व्यापार के अवसरों पर भी चर्चा की.

आइए, पीएम के दौरे के बहाने जोहान्सबर्ग के उस खजाने के बारे में जानते हैं, जो न केवल दक्षिण अफ्रीका को मालामाल करता है बल्कि दुनिया में इस शहर की पहचान से भी जुड़ गया है. इस खजाने की खोज कब हुई? इसका देश के विकास में कितना योगदान है? कहां-कहां यहां से सोना एक्सपोर्ट होता है? भंडार कितना बड़ा है, जैसे अन्य रोचक तथ्यों को भी जानने-समझने का प्रयास करेंगे.

यह भंडार विटवाटरस्रैंड बेसिन (Witwatersrand Basin) के नाम से मशहूर है, जो जोहान्सबर्ग के पास फैला हुआ है. यह खजाना न केवल खनिज संपदा का प्रतीक है, बल्कि दक्षिण अफ्रीका की आर्थिक प्रगति, औद्योगीकरण और सामाजिक परिवर्तनों का आधार भी रहा है. विटवाटरस्रैंड का सोना न केवल दक्षिण अफ्रीका को समृद्ध बनाता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जोहान्सबर्ग दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार के लिए जाना जाता है.
जोहान्सबर्ग दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार के लिए जाना जाता है.

साल 1886 बना शहर के लिए स्वर्णिम वर्ष

विटवाटरस्रैंड बेसिन में सोने की खोज 1886 में हुई, जो दक्षिण अफ्रीका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई. इस क्षेत्र में सोने के छोटे-मोटे अवशेष पहले भी मिल चुके थे, लेकिन व्यवस्थित खोज जॉर्ज हैरिसन (George Harrison) नामक एक ऑस्ट्रेलियाई ने की. जुलाई 1886 में, लैंग्लाग्टे (Langlaagte) फार्म पर हैरिसन ने एक कांग्लोमरेट चट्टान में सोने के कण पाए. यह खोज संयोगवश हुई, जब वे गाड़ी की मरम्मत कर रहे थे और चट्टान को तोड़ने पर सोना चमक उठा.

इस खोज ने रैंड गोल्ड रश (Rand Gold Rush) को जन्म दिया, जो कैलिफोर्निया गोल्ड रश से भी बड़ा था. 1884 में जान गेरिट बैंटजेस (Jan Gerrit Bantjes) ने भी इस क्षेत्र में सोने के छोटे रीफ खोजे थे, लेकिन 1886 की खोज ने ही वास्तविक उन्माद पैदा किया. खबर फैलते ही हजारों खनिक ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन से दक्षिण अफ्रीका पहुंचे. जोहान्सबर्ग शहर की नींव इसी रश से पड़ी, जो पहले एक छोटा सा कैंप था और आज दक्षिण अफ्रीका का आर्थिक केंद्र है.

खोज के तुरंत बाद, दक्षिण अफ्रीकी गणराज्य ने इस क्षेत्र को सार्वजनिक खुदाई के लिए घोषित कर दिया। 1886 के अंत तक, यहां 3,000 से अधिक लोग बस चुके थे। यह खोज न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण थी, बल्कि राजनीतिक रूप से भी. ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने इस सोने पर कब्जा करने की कोशिश की, जो दूसरे बोअर युद्ध (1899-1902) का एक कारण बना. इसी रश ने दक्षिण अफ्रीका को वैश्विक पटल पर ला दिया.

विटवाटरस्रैंड से निकला सोना दुनिया भर में जाता है. फोटो: Getty Images
विटवाटरस्रैंड से निकला सोना दुनिया भर में जाता है. फोटो: Getty Images

देश की प्रगति में सोने का बड़ा योगदान

विटवाटरस्रैंड का सोना दक्षिण अफ्रीका की प्रगति का इंजन रहा है. 19वीं सदी के अंत में, दक्षिण अफ्रीका एक कृषि-प्रधान देश था, लेकिन सोने की खोज ने इसे औद्योगिक शक्ति बना दिया. इस बेसिन से निकला सोना दुनिया के कुल सोना उत्पादन का 30-40% रहा है. साल 1886 से अब तक यह क्षेत्र दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था को आकार देता आया है. सोने ने जोहान्सबर्ग को दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर बनाया.

10 वर्षों में यह केप टाउन से बड़ा हो गया था. रेलवे लाइनें, बिजलीघर और कारखाने सोने के कारण बने. 20वीं सदी में, सोना दक्षिण अफ्रीका के निर्यात का 50% से अधिक था, जो विदेशी मुद्रा लाकर विकास को बढ़ावा देता था. अनेक विपरीत हालातों में भी सोना अर्थव्यवस्था को मजबूती देता रहा. आज यही सोना दक्षिण अफ्रीका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8-10% योगदान देता है. इसकी वजह से नौकरियां भी खूब आईं. भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार समझौतों में सोने का महत्वपूर्ण स्थान था, जो द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देता है.

सोना और वैश्विक बाजार में दक्षिण अफ्रीका

विटवाटरस्रैंड से निकला सोना दुनिया भर में जाता है. साल 2022 में, दक्षिण अफ्रीका ने 22.7 अरब डॉलर का सोना निर्यात किया. चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है, जहां आभूषण और निवेश के लिए इस्तेमाल होता है. चीन ने 8.85 अरब डॉलर का सोना आयात किया. स्विट्जरलैंड ने 5.63 अरब डॉलर का सोना आयात किया. स्विट्जरलैंड रिफाइनिंग हब है, जो सोने को शुद्ध कर आगे निर्यात करता है.

सोने ने जोहान्सबर्ग को दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर बनाया.
सोने ने जोहान्सबर्ग को दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर बनाया.

भारत ने भी 3.33 अरब डॉलर सोने के निर्यात में लगाया. हम सब जानते हैं कि भारत में सोना सांस्कृतिक महत्व रखता है, विवाह और निवेश के लिए खरीदा जाता है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1.62 अरब डॉलर का सोना खरीदा. सर्वविदित है कि दुबई गोल्ड मार्केट का केंद्र है. इन सबके अलावा हाँगकाँग समेत कुछ अन्य देश मिलकर दक्षिण अफ्रीका के सोने का 80 फीसदी से अधिक खरीदते हैं.

क्या है खनन का तरीका और चुनौतियां?

विटवाटरस्रैंड में खनन मुख्य रूप से अंडरग्राउंड होता है. बेसिन की चट्टानें कई किलोमीटर गहरी हैं, जो दुनिया के सबसे गहरे खदानों में से एक है. गहराई और अंदर तापमान ज्यादा होने की वजह से कई बार मजदूरों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. वैज्ञानिकों और तकनीक ने खनन प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया है लेकिन मुश्किलें फिर भी कायम हैं. भूवैज्ञानिक सर्वे से रीफ (सोने वाली परतें) की पहचान करते हैं. फिर तिरछे शाफ्ट खोदे जाते हैं. क्षैतिज टनल (लेवल्स) बनाए जाते हैं, जहां विस्फोट से चट्टान तोड़ी जाती है. फिर सोना युक्त कांग्लोमरेट को तोड़ा, क्रश किया और सायनाइड लीचिंग से अलग किया जाता है. इसके लिए सरकार कूलिंग सिस्टम, वेंटिलेशन और मजदूर सुरक्षा के लिए हेलमेट, ऑक्सीजन मास्क आदि भी देती है, जिससे चुनौतियाँ कुछ हद तक कम की जा सके. यह विधि श्रम-साध्य है और दुर्घटनाओं का खतरा रहता है.

कितना बड़ा खजाना बाकी?

विटवाटरस्रैंड दुनिया का सबसे बड़ा सोना भंडार है, जो चार सौ किमी लंबा और डेढ़ सौ किमी चौड़ा बताया जाता है. अब तक यहां से 50 हजार टन से ज्यादा सोना निकाला गया, जो वैश्विक उत्पादन का 22 फीसदी है. एक अनुमान के आधार पर मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लगभग 32 हजार टन सोना अभी भी है, लेकिन कम गुणवत्ता और गहराई के कारण खुदाई बेहद चुनौतीपूर्ण है. यह भंडार मुख्य रूप से कांग्लोमरेट रीफ में है, जो 2.97 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों से बनी है.

बोअर युद्ध का कारण बना था यही सोना

विटवाटरस्रैंड ने दक्षिण अफ्रीका को बदल दिया. यह बोअर युद्ध का कारण बना, जहां ब्रिटिशों ने सोने पर कब्जा किया. अपार्टहाइड के दौरान, लाखों मजदूर खदानों में काम करते थे, लेकिन वेतन कम और शर्तें खराब थीं. आज, अवैध खनन एक समस्या है, जहां अप्रवासी अवशेष खदानों में काम करते हैं. अनेक उपायों के बावजूद अभी भी बड़ी मात्रा में अवैध सोना सालाना निकलता है.

खनन से एसिड माइन ड्रेनेज होता है, जो पानी दूषित करता है. जोहान्सबर्ग के आसपास बहुत बड़ी संख्या में परित्यक्त खदानें हैं, जो स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती हैं. इसी खनन ने घास के खूबसूरत मैदानों को शहरी जंगल में बदल दिया. आबादी बढ़ी है तो पर्यावरण की अन्य चुनौतियां भी सामने हैं.

रैंड रिफाइनरी 98 फीसदी सोना निर्यात करती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और गिरते भंडार चुनौतियां हैं. भारत जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ रहा है, जहां सोना सांस्कृतिक महत्व रखता है. विटवाटरस्रैंड न केवल धन का स्रोत है, बल्कि संघर्ष, नवाचार और प्रगति की कहानी भी है. यह याद दिलाता है कि प्रकृति के खजाने का उपयोग जिम्मेदारी से करना चाहिए.