सुप्रीम कोर्ट में एक अहम मामले में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने खुद को सुनवाई से अलग (recuse) कर लिया है। यह फैसला उस समय आया, जब कोर्ट पहले ही इस केस में अपना फैसला सुरक्षित रख चुका था।
क्यों किया खुद को अलग?
जस्टिस विश्वनाथन को बाद में यह जानकारी मिली कि वे पहले इसी मामले में अपीलकर्ता पक्ष के वकील रह चुके हैं। यानी उन्होंने अतीत में इस केस से जुड़े एक पक्ष का प्रतिनिधित्व किया था, जिसके चलते निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने खुद को अलग करना उचित समझा।
क्या कहा कोर्ट ने?
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि:
- मामला पूरी तरह सुना जा चुका था
- फैसला सुरक्षित भी रख लिया गया था
- लेकिन बाद में जज को अपने पुराने जुड़ाव की जानकारी मिली
इसके बाद बेंच ने अपने पहले के आदेश (17 मार्च) को वापस लेते हुए मामले को नई बेंच के सामने रखने का निर्देश दिया।
कौन-कौन थे बेंच में?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच कर रही थी। अब यह केस भारत के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर किसी दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा।
जस्टिस विश्वनाथन का बैकग्राउंड
जस्टिस विश्वनाथन को 19 मई 2023 को सीधे बार (वकालत) से सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे देश के प्रमुख वरिष्ठ वकीलों में शामिल थे और 2009 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला था।
क्यों अहम है यह फैसला?
जज का खुद को केस से अलग करना न्यायिक निष्पक्षता (judicial fairness) का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी मामले में हितों का टकराव (conflict of interest) न हो और न्याय प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।


