अगले माह नवंबर की 24 तारीख को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर शपथ लेने वाले जस्टिस सूर्यकांत के फैसले, आदेश और सबक देने वाली बेबाक टिप्पणियां कानूनी बारिकियों, दूरदर्शिता, समाजिकता और उनकी सरलता को दर्शाती हैं. बतौर जज दो दशक से ज्यादा अनुभव रखने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने बिहार एसआईआर से चुनावी आरक्षण तक के मामलों में अहम आदेश दिए हैं. वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को वैध करार देने वाला उनका फैसला अपने आप में एक मिसाल है.
जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणियों को सुनने वाले वकील अनुपम मिश्रा, अभिषेक राय, ज्ञानंत सिंह और डीके गर्ग मानते हैं कि जस्टिस कांत की टिप्पणियां कानूनी पेचिदगियों की बेड़ियों को तोड़ने वाली सरल भाषा में अनोखी और बेबाक होती हैं. सुनवाई के दौरान कई मौकों पर रहने वाले इन वकीलों का कहना है कि जस्टिस कांत मामले से संबंधित हरेक पहलू पर गौर करते हैं और कमियों को लेकर ही टिप्पणी करते हैं, वह कानून से जुड़ी हो या फिर समाज में व्याप्त किसी भी खामी से.
हाल ही में की गई उनकी एक टिप्पणी का जिक्र करते हुए वकील मिश्रा ने कहा कि देश में आरक्षण का मामला एक रेलवे की तरह हो गया, यह कटाक्ष सिर्फ आरक्षण पर नहीं, बल्कि रेलवे पर भी था. हवाई यात्रा करने वाले जज ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते. वहीं वकील सिंह ने कहा कि एक सुनवाई के दौरान जस्टिस कांत ने कहा कि अच्छे वकीलों की फीस इतनी ज्यादा है कि उन्हें चुका पाना आम नागरिकों के मंथली इनकम के बस की बात नहीं है. यह कोई साधारण बात नहीं है. वह आम नागरिकों की न्याय पाने की जद्दोजहद और वकीलों की भारी-भरकम फीस, दोनों का दशा जानते हैं, समझते हैं. क्योंकि उनका सफर जमीन से शुरू हुआ. उन्होंने अपने लिए खुद जगह बनाई है.
इन बेंच का रहे हैं हिस्सा
जस्टिस सूर्यकांत अनुच्छेद-370, पेगासस स्पाईवेयर, ओआरओपी जैसे तमाम मसलों से जुड़ी बेंच का हिस्सा रहे हैं. वह ब्रिटिश काल के राजद्रोह कानून को स्थगित करने वाली और फैसला देने वाली बेंच में भी शामिल थे, जिसने आदेश दिया था कि सरकार की समीक्षा तक इसमें कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी. हाल ही में उन्होंने चुनाव आयोग से बिहार चुनाव से पहले एसआईआर का पूरा ब्यौरा जनता के बीच साझा करने का आदेश भी दिया था. मौजूदा समय सैन्य बलों में स्थायी कमीशन में महिला अधिकारियों के लिए समानता के अनुरोध वाली याचिका पर भी वो सुनवाई कर रहे हैं. जस्टिस सूर्यकांत उन सात जजों की संविधान पीठ का हिस्सा भी थे, जिसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर दोबारा विचार का रास्ता खोलने वाले फैसले को रद्द कर दिया था.
कानूनी सहायता मुहैया कराने की सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत अनोखी जुगत कारगर साबित हुई. लाउडस्पीकरों पर घोषणाओं, कैदियों से संवाद और पर्चे बंटवाने के कदमों से बड़ी तादाद में कानूनी सहायता की मांग सामने आई. सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC) को पिछले दो माह में 2000 से ज्यादा आपराधिक अपीलें मिली. ऐसा उसकी स्थापना के बाद पहली बार हुआ है, जबकि पिछले साल तक कानूनी सहायता की मांग का सालाना आंकड़ा 1000 तक ही रहता था.
क्या है जस्टिस सूर्यकांत की संपत्ति-
जस्टिस सूर्यकांत के पास एक चंडीगढ़ में मकान है. साथ ही, वे पंचकुला जिले के गोलपुरा गांव में साढ़े 13 एकड़ के करीब एक खेती वाली जमीन के भी मालिक हैं. ये जमीन भी वो घर की तरह अपनी पत्नी के साथ साझा करते हैं. वहीं, गुरूग्राम के सुशांत लोक में भी उनके पास 300 वर्ग यार्ड प्लॉट है. एफडी के तौर पर जस्टिस सूर्यकांत के पास करीब 1 करोड़ रूपये है, वहीं, जनरल पीएफ खाते में करीब 1 करोड़ तो पीपीएफ में साढ़े बारह लाख रूपये जमा है.
जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणियां-
- क्या कोई न्यायाधीशों की स्थिति समझता है और यह जानता है कि वे कितने घंटे काम करते हैं तथा कितने घंटे सो पाते हैं
- हाईकोर्ट के कुछ जजों का परफॉर्मेंस काफी निराशाजनक है, जिन लोगों के समर्पण में कमी है। मैं उनसे एक विनती करना चाहता हूं जब भी आप रात में सोने के लिए जाएं तो लेटने के बाद तकिए पर अपना सिर रखें तो अपने आप से एक सवाल पूछें कि- मुझ पर जनता का कितना पैसा हर दिन खर्च हो रहा है? जितना लोगों ने मुझ पर विश्वास किया, क्या मैं समाज को उतना लौटा पा रहा हूं?
- भारत में संयुक्त राष्ट्र (UN) की एजेंसी द्वारा प्रवासियों को शरणार्थी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर इन्होंने यहां शोरूम खोल रखा है और सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं.
- हमने न्याय के मंदिर तो बना दिए पर उसके दारवाजे काफी संकरे हैं. अच्छे वकीलों की फीस इतनी ज्यादा है कि उन्हें चुका पाना आम नागरिकों के मंथली इन्कम के बस की बात नहीं है.
- भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणी पर… इस संस्थान (सुप्रीम कोर्ट) पर हर दिन हमले होते रहते हैं. हमें इसकी चिंता नहीं है.
- महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित सुनवाई के दौरान… इस देश में आरक्षण का मामला एक रेलवे की तरह हो गया है जो लोग डिब्बे में प्रवेश कर चुके हैं, वे किसी और को प्रवेश नहीं देना चाहते। यही पूरा खेल है.
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद सोशल मीडिया पर बेतुकी बयानबाजियों पर…….सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन क्या यह समय इतना सांप्रदायिक होने की बात करने का है? देश ने एक बड़ी चुनौती का सामना किया है. दहशतगर्द हर तरफ से आए और हमारे मासूमों पर हमला किया. एकजुट रहे.
- एक जज के मामले पर….. यह जज परिस्थितियों और जातिगत पक्षपात का शिकार हुआ. सब पहले से फिक्स था. ऊंचे समुदाय के लोग बर्दाश्त ही नहीं कर पा रहे थे कि उपेक्षित समुदाय के व्यक्ति का लड़का कम उम्र में जज बन गया और उनके बीच आ गया.
- कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर नाराजगी जताते हुए मध्य प्रदेश के कैबिने मंत्री विजय शाह को सबक…..आपकी टिप्पणियों के कारण पूरा देश शर्मसार है. हमने आपके वीडियो देखे, आपने बहुत गंदी भाषा का इस्तेमाल किया. आपको शर्मिंदगी महसूस करनी चाहिए.
- बिहार में एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान…….. फॉर्म में कहां लिखा है कि सभी दस्तावेज़ होने चाहिए? इसपर कपिल सिब्बल ने कहा कि बुनियादी बात गायब है, तब जस्टिस कांत ने कहा कि यह सच है या आशंका, देखते हैं. मकसद सुविधा देना है, आधार कार्ड पर आते हैं. इसमें लिखा है नीचे दी गई सूची से ज़रूरी नहीं कि आपको सभी दस्तावेज़ देने ही हों.
- पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर नुपुर शर्मा को कड़ी फटकार लगाते हुए…….आपको पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए.


