टिकट नहीं मिला या खुद हटे? अन्नामलाई ने तोड़ी चुप्पी—कहा ‘मैंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया’

टिकट नहीं मिला या खुद हटे? अन्नामलाई ने तोड़ी चुप्पी—कहा ‘मैंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया’

तमिलनाडु चुनाव में के. अन्नामलाई का नाम उम्मीदवारों की सूची में नहीं आने के बाद कई तरह की अटकलें लग रही थीं। अब उन्होंने खुद सामने आकर साफ किया है कि उन्हें टिकट से वंचित नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने खुद चुनाव न लड़ने का फैसला लिया था। चेन्नई एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था।

“मैंने पहले ही मना कर दिया था”

अन्नामलाई ने बताया कि उन्होंने पार्टी की कोर कमेटी को पहले ही लिखित रूप में सूचित कर दिया था कि वे किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।

उन्होंने कहा: “जब मैंने चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, तो नेतृत्व मुझे टिकट कैसे देता?”

साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद भी किया, जिन्होंने उनके फैसले का सम्मान किया।

अब NDA के लिए करेंगे प्रचार

अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि अब उनका पूरा ध्यान NDA गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने पर रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु और पुडुचेरी दौरे के बाद वे भी प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

AIADMK गठबंधन के बीच उठी थीं अटकलें

उनकी अनुपस्थिति को लेकर यह भी चर्चा थी कि BJP और AIADMK के गठबंधन के कारण उन्हें टिकट नहीं मिला। हालांकि अन्नामलाई की सफाई के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है।

‘सिंघम’ से नेता तक का सफर

पूर्व IPS अधिकारी अन्नामलाई को कर्नाटक में उनकी सख्त छवि के कारण ‘सिंघम’ कहा जाता था। 2021 में तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी को राज्य में मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए, जिनमें ‘एन मन, एन मक्कल’ यात्रा भी शामिल रही। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी को सीट नहीं मिली, लेकिन वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई थी।

चुनावी तस्वीर क्या कहती है?

BJP ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची में 27 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। राज्य में एक ही चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है, और नतीजे 4 मई को आएंगे।

क्या है राजनीतिक संकेत?

अन्नामलाई का चुनाव न लड़ना एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है, जहां वे खुद मैदान में उतरने के बजाय पूरे राज्य में प्रचार पर ध्यान देंगे। अब नजर इस बात पर होगी कि उनका यह फैसला NDA को कितना फायदा पहुंचाता है।