गुजरात की काजल प्रजापति की कहानी सिर्फ एक सरकारी नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है। यह उस जिद और हौसले की कहानी है, जिसने करीब एक दशक पहले हुए एसिड अटैक के बाद भी उन्हें रुकने नहीं दिया। 2016 में एक हमले में उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया था। 25 से ज्यादा सर्जरी हुईं और एक आंख की रोशनी भी चली गई। लेकिन काजल ने अपनी पढ़ाई और करियर का रास्ता नहीं छोड़ा। अब 28 साल की उम्र में उन्होंने एक साथ दो सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कर ली हैं।
पहले उन्होंने तलाटी-कम-मंत्री पद की परीक्षा पास की। इसके करीब दो महीने बाद डिप्टी मामलातदार भर्ती परीक्षा में भी सफलता हासिल कर ली। दोनों विकल्प सामने थे, लेकिन काजल ने डिप्टी मामलातदार की नौकरी चुनने का फैसला किया है। सितंबर में उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होना है।
एसिड अटैक के बाद बदली जिंदगी, लेकिन लक्ष्य नहीं
काजल की जिंदगी 14 फरवरी 2016 को पूरी तरह बदल गई थी। उस समय वह सिर्फ 18 साल की थीं और कॉमर्स के पहले वर्ष में पढ़ रही थीं।
काजल ने एक युवक का प्रपोजल ठुकरा दिया था क्योंकि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थीं। इसके बाद वैलेंटाइन डे के दिन इंजीनियरिंग के छात्र हार्दिक प्रजापति ने मेहसाणा में उनके कॉलेज के पास कथित तौर पर बाइक से पहुंचकर उन पर तेजाब फेंक दिया।
एसिड उनके चेहरे के अलावा सीने और हाथों पर भी गिरा। इस हमले ने उनके चेहरे को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इलाज का लंबा सिलसिला शुरू हुआ। 25 से ज्यादा सर्जरी हुईं और उनकी एक आंख की रोशनी चली गई।
लेकिन काजल ने अपनी जिंदगी को सिर्फ उस घटना तक सीमित नहीं होने दिया। इलाज के साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सरकारी नौकरी को अपना लक्ष्य बनाया।
कोचिंग के पैसे नहीं थे, लाइब्रेरी में रोज 8-10 घंटे पढ़ाई
सरकारी परीक्षा की तैयारी उनके लिए आसान नहीं थी। परिवार पहले से इलाज के खर्च का सामना कर रहा था। ऐसे में महंगी कोचिंग या प्राइवेट लाइब्रेरी का विकल्प उनके पास नहीं था।
काजल ने मेहसाणा की डिस्ट्रिक्ट पंचायत लाइब्रेरी को अपनी पढ़ाई का ठिकाना बनाया। वह रोज करीब 8 से 10 घंटे पढ़ती थीं।
इस तैयारी के साथ उन्हें एक और चुनौती से लड़ना पड़ा। बाहर निकलने पर लोगों की नजरें उनके चेहरे पर टिक जाती थीं। काजल ने तय किया कि वह अपना चेहरा छिपाकर जिंदगी नहीं जिएंगी।
उन्होंने कभी दुपट्टे या मास्क के पीछे अपना चेहरा नहीं छिपाया। उनका मानना था कि अगर आगे चलकर ऐसी सरकारी जिम्मेदारी निभानी है, जिसमें लोगों से रोज मिलना-जुलना होगा, तो पहले उन्हें खुद लोगों की नजरों और सवालों से सहज होना सीखना होगा।
करीब 50 हजार की सैलरी वाली नौकरी चुनी
दो सरकारी परीक्षाओं में सफलता के बाद काजल के सामने विकल्प था। उन्होंने डिप्टी मामलातदार का पद चुना, क्योंकि उनके मुताबिक यह ज्यादा प्रतिष्ठित जिम्मेदारी है।
इस पद पर उनकी बताई गई मासिक सैलरी 49,600 रुपये होगी। सितंबर में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होना है।
काजल के लिए यह उपलब्धि सिर्फ नौकरी मिलने तक सीमित नहीं है। उन्होंने लंबे इलाज, आर्थिक दबाव और सामाजिक नजरों के बीच पढ़ाई जारी रखी। अब वह आगे की जिंदगी को नए तरीके से शुरू करना चाहती हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वह अब और सर्जरी नहीं कराना चाहतीं और जिंदगी में आगे बढ़ना चाहती हैं।
भाई और दोस्तों ने मुश्किल दौर में नहीं छोड़ा साथ
काजल अपनी इस सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों और डॉक्टरों को भी देती हैं। उनके बड़े भाई राहुल, जो एक वाहन फिटनेस सेंटर में काम करते हैं, हर मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहे।
काजल बताती हैं कि राहुल लोगों से कहते हैं कि उनकी बहन सबसे मजबूत और हिम्मती है। उनके लिए भाई के ये शब्द बेहद मायने रखते हैं।
दोस्तों ने भी उनका साथ नहीं छोड़ा। सर्जरी के बाद जब उनकी आंखें ढकी हुई थीं और उन्हें दिखाई नहीं देता था, तब उनकी दोस्त जया उन्हें गांव में घुमाने ले जाती थीं। जया उन्हें लगातार बाहर निकलने और अपनी जगह दोबारा बनाने के लिए प्रेरित करती थीं।
वहीं रिंकू पटेल उनके साथ लाइब्रेरी में पढ़ती थीं। दोनों ने करीब पांच साल साथ पढ़ाई की। अब सरकारी नौकरी हासिल करने के बाद काजल की उम्मीद अपनी दोस्त से भी जुड़ी है। वह चाहती हैं कि रिंकू को भी पुलिस विभाग में वह नौकरी मिले, जिसका वह सपना देखती हैं।
काजल की कहानी उन लोगों के लिए खास संदेश देती है जो किसी मुश्किल घटना के बाद अपने भविष्य को लेकर टूट जाते हैं। उनके सामने हालात बेहद कठिन थे, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को उस हादसे तक सीमित नहीं होने दिया। करीब दस साल बाद आज उनकी मेहनत का नतीजा एक नहीं, दो सरकारी सफलताओं के रूप में सामने है।


