कर्नाटक में विभागों का बंटवारा फाइनल, DK शिवकुमार के पास वित्त समेत ये बड़े विभाग, जानें किस मंत्री को क्या मिला

कर्नाटक में विभागों का बंटवारा फाइनल, DK शिवकुमार के पास वित्त समेत ये बड़े विभाग, जानें किस मंत्री को क्या मिला

कर्नाटक की राजनीति में कई दिनों से चल रही विभागों के बंटवारे की तस्वीर अब साफ हो गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के विभागों को अंतिम रूप दे दिया है। 3 अगस्त को दूसरे चरण के मंत्रिमंडल विस्तार में शपथ लेने वाले 19 नए मंत्रियों को भी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। इसके साथ ही कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदले गए हैं। सबसे अहम बदलाव के.एच. मुनियप्पा और रामलिंगा रेड्डी के विभागों में हुआ है। वहीं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वित्त समेत कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं।

दिल्ली से कर्नाटक तक चर्चा के बाद हुआ फैसला

मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर पिछले कुछ समय से खींचतान और चर्चाओं का दौर चल रहा था। वरिष्ठ नेताओं, मंत्री पद के दावेदारों और मुख्यमंत्री के स्तर पर कई दौर की बातचीत के बाद अंतिम सूची तैयार की गई।

बताया गया कि विभागों का बंटवारा नेताओं के अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। कुछ नेताओं को उनकी पुरानी जिम्मेदारियां ही वापस मिली हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदल दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पास वित्त, कैबिनेट मामले, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, खुफिया, सूचना, कानून, न्याय एवं मानवाधिकार, संसदीय मामले, विधायी मामले और कृषि विपणन जैसे विभाग रहेंगे। जिन विभागों का अलग से आवंटन नहीं हुआ है, उनकी जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री के पास रहेगी।

मुनियप्पा और रामलिंगा रेड्डी के विभाग बदले

विभागों के फेरबदल में के.एच. मुनियप्पा और रामलिंगा रेड्डी सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। मुनियप्पा को पहले खाद्य विभाग दिया गया था। वह इस जिम्मेदारी से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात कर विभाग बदलने का अनुरोध किया था।

अब उन्हें खाद्य आपूर्ति के बजाय समाज कल्याण विभाग सौंपा गया है।

दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी को पहले जल संसाधन विभाग मिला था। वह भी इस जिम्मेदारी से नाराज बताए गए थे और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी। अब उनका विभाग बदलकर वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण कर दिया गया है।

इन बदलावों से साफ है कि सरकार ने वरिष्ठ नेताओं की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए विभागों का दोबारा संतुलन बनाने की कोशिश की है।

किस मंत्री को कौन सा विभाग मिला?

दूसरे चरण में शामिल मंत्रियों में लक्ष्मण सवादी को सहकारिता, संतोष लाड को श्रम और मधु बंगारप्पा को प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग मिला है। एन. चालुवरयास्वामी को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

शिवराज थंगडगी को पिछड़े वर्गों का कल्याण, कन्नड़ और संस्कृति विभाग मिला है। बसवरजा रायरेड्डी उच्च शिक्षा, एच.सी. बालकृष्ण नगर प्रशासन और के.एस. बसवनथप्पा मुजाराई एवं मत्स्य पालन संभालेंगे।

एस.एस. मल्लिकार्जुन को खान एवं भूविज्ञान, बी. नागेंद्र को योजना एवं सांख्यिकी और नरेंद्रस्वामी को कृषि विभाग दिया गया है। सी. पुत्तरंगशेट्टी के पास पशुपालन और रेशम उत्पादन की जिम्मेदारी रहेगी।

टी. रघुमूर्ति को अनुसूचित जनजाति कल्याण, रिजवान अरशद को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और रुद्रप्पा लमानी को चीनी एवं कपड़ा विभाग मिला है। शिवलिंगेगौड़ा आबकारी और विजयानंद कशप्पनवर लघु उद्योग विभाग संभालेंगे।

अजय सिंह को लघु सिंचाई और आईटी-बीटी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बी.जेड. जमीर अहमद खान को आवास विभाग सौंपा गया है। यू.टी. खादर को अल्पसंख्यक कल्याण, हज एवं वक्फ के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मिला है।

पहले चरण के मंत्रियों में भी हुआ फेरबदल

पहले चरण में जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ बड़े मंत्रियों के विभाग भी बदले गए हैं। उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर के पास राजस्व और युवा सशक्तिकरण एवं खेल विभाग रहेगा। प्रियांक खड़गे को गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

के.जे. जॉर्ज ऊर्जा और पर्यटन विभाग संभालेंगे। एम.बी. पाटिल को बड़े और मध्यम उद्योग विभाग दिया गया है। सतीश जारकीहोली लोक निर्माण विभाग देखेंगे।

कृष्णा भैरेगौड़ा को बेंगलुरु विकास (जीबीए), भैरती सुरेश को परिवहन और डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को शहरी विकास विभाग मिला है। डॉ. शरणप्रकाश पाटिल चिकित्सा शिक्षा और ईश्वर खंड्रे ग्रामीण विकास विभाग संभालेंगे।

मंत्रियों को विभाग मिलने के बाद अब सरकार के कामकाज में भी तेजी आने की उम्मीद है। खासकर वित्त, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, ग्रामीण विकास और शहरी प्रशासन जैसे विभाग सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। ऐसे में नए विभागों के साथ मंत्रियों की प्राथमिकताएं और उनके फैसले आने वाले समय में सरकार के कामकाज की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।