‘करप्शन रेट कार्ड’ विज्ञापन पर सिद्धारमैया को बड़ी राहत, BJP की मानहानि याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, राहुल गांधी और DK शिवकुमार को भी मिल चुकी है राहत

‘करप्शन रेट कार्ड’ विज्ञापन पर सिद्धारमैया को बड़ी राहत, BJP की मानहानि याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, राहुल गांधी और DK शिवकुमार को भी मिल चुकी है राहत

कर्नाटक की राजनीति में 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान ‘करप्शन रेट कार्ड’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया के खिलाफ बीजेपी की ओर से दर्ज कराई गई आपराधिक मानहानि की शिकायत को रद्द कर दिया है। यह मामला उन विज्ञापनों से जुड़ा था, जिन्हें कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय अखबारों में प्रकाशित कराया था। इन विज्ञापनों में तत्कालीन बीजेपी सरकार पर सरकारी विभागों में नियुक्तियों और तबादलों के लिए कथित तौर पर रिश्वत और कमीशन लेने के आरोप लगाए गए थे। बीजेपी ने इसे पार्टी की छवि खराब करने वाला झूठा प्रचार बताते हुए मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। बुधवार, 4 नवंबर को जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने इस मामले में सिद्धारमैया को राहत देते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का आदेश दिया।

‘करप्शन रेट कार्ड’ विज्ञापन बना था राजनीतिक विवाद की वजह

इस पूरे विवाद की शुरुआत 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी। उस समय कांग्रेस ने राज्य के अलग-अलग स्थानीय अखबारों में ‘करप्शन रेट कार्ड’ नाम से विज्ञापन प्रकाशित कराए थे।

इन विज्ञापनों के जरिए कांग्रेस ने तत्कालीन बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। विज्ञापनों में दावा किया गया था कि सरकार के विभिन्न विभागों में नियुक्तियों और तबादलों के लिए कथित तौर पर पैसे और कमीशन की दरें तय थीं।

कांग्रेस ने इन आरोपों के जरिए बीजेपी सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी। वहीं, बीजेपी ने इन विज्ञापनों को पूरी तरह झूठा और पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।

बीजेपी की राज्य इकाई का आरोप था कि कांग्रेस ने चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जानबूझकर भ्रामक प्रचार किया। पार्टी ने इन आरोपों को कांग्रेस नेताओं की काल्पनिक सोच करार दिया था।

‘डबल इंजन’ को ‘ट्रबल इंजन’ बताने पर भी जताई थी आपत्ति

बीजेपी ने अपनी शिकायत में केवल भ्रष्टाचार से जुड़े विज्ञापनों को ही मुद्दा नहीं बनाया था। पार्टी ने कांग्रेस के उस राजनीतिक संदेश पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें लोकप्रिय नारे ‘डबल इंजन सरकार’ को बदलकर ‘ट्रबल इंजन सरकार’ कहा गया था।

बीजेपी का कहना था कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल पार्टी की प्रतिष्ठा और राजनीतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया।

पार्टी ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह के विज्ञापनों और प्रचार के जरिए मतदाताओं के बीच बीजेपी की छवि खराब करने की कोशिश हुई। इसी आधार पर राज्य बीजेपी इकाई ने सिद्धारमैया समेत कांग्रेस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

ट्रायल कोर्ट ने 2023 में इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की थी।

सिद्धारमैया से पहले राहुल गांधी और DK शिवकुमार को भी मिली राहत

इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट पहले भी कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को राहत दे चुका है।

इसी शिकायत से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने इस साल जनवरी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद 4 जुलाई को अदालत ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी थी। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) को भी इसी मामले में राहत मिली थी।

अब 4 नवंबर को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला भी रद्द कर दिया गया है।

इससे 2023 के चुनावी विज्ञापनों को लेकर बीजेपी की शिकायत में नामजद कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना का आदेश, सिद्धारमैया के खिलाफ केस खत्म

मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सिद्धारमैया की याचिका स्वीकार करते हुए संक्षिप्त आदेश सुनाया।

अदालत ने कहा कि याचिका मंजूर की जाती है और संबंधित मामला रद्द किया जाता है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पिछले साल ही इस मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। अब अदालत ने आपराधिक मुकदमे को ही समाप्त कर दिया है।

इस फैसले से सिद्धारमैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, इस आदेश को बीजेपी के विज्ञापनों में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की न्यायिक पुष्टि या खंडन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत का फैसला संबंधित आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से जुड़ा है।

राजनीतिक तौर पर यह फैसला कांग्रेस के लिए राहत भरा है, क्योंकि 2023 के चुनाव में इस्तेमाल किए गए ‘करप्शन रेट कार्ड’ विज्ञापन को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं पर कानूनी कार्रवाई का खतरा बना हुआ था।