वाल्मीकि निगम घोटाले ने फिर छीनी बी नागेंद्र की कुर्सी! भावुक होकर मंत्री और विधायक पद से इस्तीफा, बोले- ED-CBI से नहीं डरूंगा

वाल्मीकि निगम घोटाले ने फिर छीनी बी नागेंद्र की कुर्सी! भावुक होकर मंत्री और विधायक पद से इस्तीफा, बोले- ED-CBI से नहीं डरूंगा

कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि निगम घोटाला एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गया है। इस मामले में घिरे बी नागेंद्र ने दोबारा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। बेंगलुरु लौटने के बाद विधान सौधा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नागेंद्र भावुक हो गए और रोते हुए कहा कि वह पार्टी को किसी तरह की शर्मिंदगी में नहीं डालना चाहते। उन्होंने सिर्फ मंत्री पद ही नहीं, बल्कि विधायक पद से भी इस्तीफा देने की घोषणा की।

नागेंद्र का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब विधानसभा के मानसून सत्र में बीजेपी और जेडीएस ने वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर उनके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था। राजनीतिक दबाव बढ़ने के बीच नागेंद्र ने अपना पद छोड़ने का फैसला किया।

दिलचस्प बात यह है कि एक ही घोटाले के कारण नागेंद्र को दूसरी बार मंत्री पद गंवाना पड़ा है।

पहले 2024 में छोड़ी थी कुर्सी, फिर 2026 में वापसी

बी नागेंद्र इससे पहले 6 जून 2024 को भी मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके थे। उस समय वह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में मंत्री थे और वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े वित्तीय अनियमितता मामले में उनका नाम राजनीतिक विवाद के केंद्र में था।

इसके बाद 3 अगस्त 2026 को उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल में दोबारा मंत्री पद की शपथ ली। उनकी वापसी के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए। विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी और जेडीएस ने इस मुद्दे को फिर जोर-शोर से उठाया।

आखिरकार विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच नागेंद्र ने दोबारा इस्तीफा दे दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा है ताकि पार्टी को उनके कारण किसी तरह की परेशानी या शर्मिंदगी न उठानी पड़े। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए।

रोते हुए बोले- बिना वजह गिरफ्तार कर तीन महीने जेल में रखा

नागेंद्र ने दावा किया कि 2024 में मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब तीन महीने जेल में रखा गया। उनके मुताबिक, बाद में अदालत से उन्हें जमानत मिल गई और वह जेल से बाहर आए।

उन्होंने कहा कि वह दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह मनुस्मृति समर्थकों की कथित धूर्तता के सामने नहीं झुकेंगे, बल्कि संविधान के आगे झुकेंगे।

इस्तीफे के बाद नागेंद्र ने राजनीतिक तौर पर भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया गया क्योंकि वह एक आदिवासी व्यक्ति हैं और कुछ लोग नहीं चाहते कि आदिवासी समाज का कोई व्यक्ति आगे बढ़े।

उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि वह ईडी और सीबीआई से डरने वाले नहीं हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी से जनता के सामने आकर अपने सभी सबूतों का सामना करने की बात कही।

ये सभी आरोप और दावे नागेंद्र की ओर से किए गए हैं।

आखिर क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?

वाल्मीकि निगम घोटाला कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए निर्धारित सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला है।

यह मामला मई 2024 में सामने आया। निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. ने शिवमोग्गा स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।

बताया गया कि निगम को एसटी कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के लिए कुल 187 करोड़ रुपये का अनुदान मिला था। आरोप है कि इसमें से करीब 88 करोड़ रुपये से लेकर 89.6 करोड़ रुपये तक की रकम जाली दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के जरिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एमजी रोड शाखा से अनधिकृत खातों में ट्रांसफर की गई।

यही वित्तीय लेनदेन आगे चलकर बड़े राजनीतिक और जांच संबंधी विवाद का कारण बना।

दूसरी बार इस्तीफा, अब आगे क्या?

बी नागेंद्र का दोबारा मंत्री पद छोड़ना कर्नाटक सरकार और कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से अहम घटनाक्रम है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि वह कुछ ही हफ्ते पहले फिर से मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे।

एक तरफ विपक्ष इस मामले को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है। दूसरी तरफ नागेंद्र अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक निशाना बनाए जाने से जोड़ते रहे हैं।

अब उनके विधायक पद से इस्तीफा देने के ऐलान के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, उनके इस्तीफे के राजनीतिक और कानूनी प्रभाव आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

फिलहाल इतना साफ है कि वाल्मीकि निगम घोटाला कर्नाटक की राजनीति में खत्म नहीं हुआ है। बी नागेंद्र की दूसरी बार मंत्री पद से विदाई ने इस पुराने मामले को फिर से राज्य की सियासत के केंद्र में ला दिया है।