कोलकाता में अभिषेक बनर्जी और सयानी घोष के नाम से जुड़े फ्लैट विवाद पर अचानक विराम लग गया है। पूरा मामला 360 डिग्री घूम गया है। जिन दो नामों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा छिड़ी थी, वे टीएमसी के सांसद नहीं बल्कि कोलकाता के एक सामान्य दंपति के नाम हैं।
बुधवार को जब नगर निगम के अधिकारी फ्लैट पर पहुंचे तो नेमप्लेट पर ‘अभिषेक-सयानी’ लिखा दिखा। दरवाजा खटखटाने पर बाहर आए व्यक्ति ने जो कुछ कहा, वह सुनकर सब हैरान रह गए। उन्होंने साफ बताया कि यह उनका अपना फ्लैट है, उनका नाम अभिषेक बनर्जी है और उनकी पत्नी का नाम सयानी घोष है। इस खुलासे के बाद विवाद की सारी हवा निकल गई।
असली मालिक का बयान: हमारा कोई राजनीतिक संबंध नहीं
फ्लैट (19 D, सेवन टैंक्स लेन रोड, 700030) के मालिक अभिषेक बनर्जी ने बताया कि वे एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। राजनीति से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उनकी पत्नी सयानी घोष स्कूल में शिक्षिका हैं। दंपति अपने दो बच्चों और अभिषेक की मां के साथ इस फ्लैट में 2022 से रह रहे हैं।
अभिषेक ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी पहले भी आ चुके थे और उन्होंने हर बार पूर्ण सहयोग किया। इस घटना से उन्हें काफी दुख और परेशानी हुई है। आम आदमी के नजरिए से देखें तो नाम की समानता के कारण किसी की निजी जिंदगी और प्रतिष्ठा पर बिना वजह संकट आ जाना कितना परेशान करने वाला हो सकता है।
TMC सांसदों ने पहले ही किया था खंडन
टीएमसी सांसद सयानी घोष ने पहले ही इस संपत्ति से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी सारी संपत्तियों का पूरा ब्योरा चुनावी हलफनामे में उपलब्ध है। अगर किसी को शक है तो वह सरकारी रिकॉर्ड देख सकता है। सयानी ने गलत आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
अभिषेक बनर्जी (टीएमसी सांसद) की तरफ से भी इस फ्लैट से दूरी बनाए रखने का रुख पहले ही स्पष्ट था। अब जब असली मालिक सामने आ गए हैं तो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला थम गया है।
नाम की समानता से आम लोगों की मुश्किल
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि प्रसिद्ध नामों की समानता कितनी परेशानी खड़ी कर सकती है। कोलकाता के इस सामान्य परिवार को बिना वजह मीडिया और प्रशासनिक जांच का सामना करना पड़ा। अभिषेक बनर्जी (आम नागरिक) ने स्पष्ट किया कि वे निजी क्षेत्र में काम करते हैं और परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं।
पूरा मामला शुरू में राजनीतिक रंग ले चुका था, लेकिन अब सच्चाई सामने आने के बाद यह सिर्फ नामों की दुविधा बनकर रह गया है। आम पाठक के लिए यह घटनाक्रम याद दिलाता है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में कभी-कभी बिना जांच के आरोप कैसे किसी की जिंदगी प्रभावित कर सकते हैं।
अब उम्मीद की जा रही है कि इस खुलासे के बाद फ्लैट मालिक को आगे किसी परेशानी का सामना न करना पड़े और उनका निजी जीवन सामान्य रूप से चले।


