2023 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को भी मिल सकती है ₹25 लाख की टैक्स छूट! ITAT के फैसले से खुली राहत की राह

2023 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को भी मिल सकती है ₹25 लाख की टैक्स छूट! ITAT के फैसले से खुली राहत की राह

रिटायरमेंट के समय मिलने वाली लीव एनकैशमेंट की रकम पर टैक्स को लेकर हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), चेन्नई ने एक अहम मामले में कहा है कि 24 मई 2023 को लीव एनकैशमेंट पर बढ़ाई गई टैक्स छूट की सीमा को पिछली तारीख से भी लागू किया जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि 2023 से पहले रिटायर हो चुके कुछ कर्मचारियों को भी ₹25 लाख तक की छूट का फायदा मिल सकता है, जबकि पहले उनके लिए सीमा ₹3 लाख थी।

हालांकि, इसे हर रिटायर्ड कर्मचारी के लिए अपने-आप लागू होने वाली राहत नहीं माना जाना चाहिए। ITAT का फैसला जिस मामले में आया है, उसकी परिस्थितियां और कानूनी आधार महत्वपूर्ण हैं।

₹3 लाख से सीधे ₹25 लाख हुई सीमा, लेकिन पुरानों का क्या?

लीव एनकैशमेंट का मतलब रिटायरमेंट के समय बची हुई अर्जित छुट्टियों के बदले मिलने वाली रकम है। 24 मई 2023 से सरकार ने गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए इस रकम पर टैक्स छूट की अधिकतम सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दी थी।

सवाल यह उठा कि जिन लोगों ने इस बदलाव से पहले रिटायरमेंट ले लिया था, क्या उन्हें भी बढ़ी हुई सीमा का लाभ मिल सकता है?

चेन्नई ITAT के 12 जून 2026 के आदेश ने इस सवाल को महत्वपूर्ण बना दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बढ़ी हुई सीमा को पिछली तारीख से लागू किया जा सकता है। फैसले में PSU और प्राइवेट सेक्टर से रिटायर कर्मचारियों के मामले को भी राहत के दायरे में माना गया है।

ONGC के रिटायर्ड कर्मचारी का मामला बना आधार

यह पूरा मामला ONGC के रिटायर्ड कर्मचारी वट्टिकुंडाला प्रभाकर राव से जुड़ा है। वित्त वर्ष 2019-20 में रिटायरमेंट के समय उन्हें ₹19.05 लाख की लीव एनकैशमेंट मिली थी।

राव ने असेसमेंट ईयर 2020-21 का ITR दाखिल करते समय इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10AA)(ii) के तहत पूरी रकम पर टैक्स छूट का दावा किया। लेकिन इनकम टैक्स विभाग के सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर ने सिर्फ ₹3 लाख की छूट स्वीकार की। बाकी रकम को टैक्स के दायरे में रखा गया।

राव ने इसके खिलाफ अपील की, लेकिन कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील्स) ने भी उनका दावा खारिज कर दिया। उनका कहना था कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से सीमा बढ़ाने का नोटिफिकेशन लागू नहीं हुआ था, तब तक ₹3 लाख की पुरानी सीमा ही प्रभावी थी।

इसके बाद मामला ITAT पहुंचा। यहां अपील में 1,023 दिनों की देरी हुई थी। ट्रिब्यूनल ने इस देरी को भी माफ कर दिया। ITAT ने माना कि राव किसी अंतिम न्यायिक फैसले का इंतजार कर रहे थे और उनकी देरी को परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

ITAT ने क्यों माना कि पुरानी तारीख से मिल सकता है फायदा?

मामले की सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग की ओर से कहा गया कि ₹25 लाख की बढ़ी हुई सीमा केवल 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हुई। इसलिए 2020-21 के असेसमेंट ईयर में इसका फायदा नहीं दिया जा सकता।

दूसरी ओर, राव के वकील ने तर्क दिया कि यह बदलाव टैक्सपेयर्स को राहत देने वाला और सुधारात्मक कदम है। उन्होंने नोटिफिकेशन के साथ जारी स्पष्टीकरण मेमोरैंडम का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि बदलाव को पिछली तारीख से लागू करने पर किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

ITAT ने इस दलील को मजबूत माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि करीब दो दशक बाद छूट सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करना एक बड़ा बदलाव था। इसका उद्देश्य गैर-सरकारी कर्मचारियों और सरकारी कर्मचारियों के बीच लीव एनकैशमेंट के टैक्स लाभ में मौजूद अंतर को कम करना था।

एक ही स्थिति वाले कर्मचारियों में अंतर क्यों? ITAT की अहम टिप्पणी

ट्रिब्यूनल ने एक अहम बात पर गौर किया। अगर नोटिफिकेशन से पहले रिटायर हुए कर्मचारी को ₹3 लाख की सीमा तक ही छूट मिले और उसी स्थिति में बाद में रिटायर हुए कर्मचारी को ₹25 लाख की छूट मिल जाए, तो दोनों के बीच एक कृत्रिम अंतर पैदा हो सकता है।

ITAT ने माना कि इससे उस संशोधन का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ सकता है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि जो टैक्स प्रावधान किसी व्यक्ति को राहत देने और पुरानी कठिनाई को दूर करने के लिए बनाए जाते हैं, उनकी व्याख्या उदार तरीके से की जा सकती है। खासकर तब, जब इससे राजस्व के किसी स्थापित अधिकार पर प्रतिकूल असर न पड़ रहा हो।

इस फैसले से उन रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है, जिन्होंने ₹3 लाख से अधिक की लीव एनकैशमेंट पर पहले ही टैक्स का भुगतान कर दिया था। हालांकि, किसी व्यक्ति को वास्तव में कितना लाभ मिलेगा, यह उसके मामले के तथ्यों और लागू टैक्स नियमों पर निर्भर करेगा।