लखनऊ में साइबर ठगों के नेटवर्क का भंडाफोड़! 5 इलाकों में पुलिस की रेड, एक दर्जन SIM Box बरामद

लखनऊ में साइबर ठगों के नेटवर्क का भंडाफोड़! 5 इलाकों में पुलिस की रेड, एक दर्जन SIM Box बरामद

लखनऊ में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और साइबर यूनिट की टीम ने शहर के कई इलाकों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में करीब एक दर्जन सिम बॉक्स बरामद किए गए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए विदेशों से आने वाली कॉल को भारतीय नंबरों के माध्यम से रूट करके लोगों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस को इस मामले के तार गुजरात, असम, गोवा समेत कई राज्यों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। कार्रवाई एडीसीपी क्राइम किरण यादव के नेतृत्व में की गई। पुलिस अब बरामद उपकरणों और उनसे जुड़े नेटवर्क की जांच में जुटी है।

इस कार्रवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सिम बॉक्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके साइबर अपराधी कॉल की वास्तविक पहचान छिपाने और विदेश से आने वाली कॉल को स्थानीय नंबरों के जरिए पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इससे आम लोगों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि फोन करने वाला व्यक्ति वास्तव में कहां से बात कर रहा है।

पांच थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी, करीब एक दर्जन SIM Box बरामद

लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी लखनऊ कमिश्नरेट के सुशांत गोल्फ सिटी, गोमतीनगर, पारा, चिनहट और बीबीडी थाना क्षेत्रों में की गई।

इस दौरान पुलिस टीम को करीब एक दर्जन सिम बॉक्स मिले हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय कॉल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क के जरिए आगे भेजने में किया जा रहा था।

पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में साइबर यूनिट की टीम भी शामिल रही। पूरी कार्रवाई एडीसीपी क्राइम किरण यादव के नेतृत्व में की गई।

फिलहाल पुलिस बरामद सिम बॉक्स, उनमें इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड और नेटवर्क से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

SIM Box के जरिए विदेश से आती थी कॉल, भारतीय नंबरों से बनाया जाता था संपर्क

इस पूरे मामले में सिम बॉक्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सिम बॉक्स एक ऐसा उपकरण होता है, जिसमें कई सिम कार्ड लगाए जा सकते हैं। इसके जरिए इंटरनेट या अन्य माध्यमों से आने वाली कॉल को मोबाइल नेटवर्क के जरिए स्थानीय कॉल की तरह आगे भेजा जा सकता है।

पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े साइबर अपराधी विदेशों में बैठकर भारतीय मोबाइल नंबरों के माध्यम से लोगों तक कॉल पहुंचाते थे। इस तरीके से कॉल करने वाले की वास्तविक लोकेशन और पहचान छिपाने में मदद मिल सकती है।

ऐसे नेटवर्क का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी कॉल और लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, लखनऊ में बरामद सिम बॉक्स का इस्तेमाल किन-किन अपराधों में हुआ और कितने लोग इस नेटवर्क से प्रभावित हुए, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

आम लोगों के लिए इसका मतलब है कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को फोन पर बैंकिंग जानकारी, OTP, पासवर्ड या निजी दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

गुजरात, असम और गोवा तक जुड़े नेटवर्क के तार, कई राज्यों में जांच की संभावना

लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई में साइबर अपराध के नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इसके तार गुजरात, असम और गोवा समेत अन्य राज्यों से भी जुड़े बताए जा रहे हैं।

इससे जांच का दायरा लखनऊ तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। पुलिस को अब यह पता लगाना होगा कि सिम बॉक्स कहां से मंगाए गए थे, इनके संचालन में कौन-कौन लोग शामिल थे और अलग-अलग राज्यों में बैठे लोगों के बीच किस तरह संपर्क स्थापित किया जाता था।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगी कि बरामद उपकरणों के जरिए कितने सिम कार्ड इस्तेमाल किए जा रहे थे और किन मोबाइल नंबरों से कॉल रूट की जा रही थीं।

IPS किरण यादव के नेतृत्व में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई

इस पूरे अभियान का नेतृत्व 2021 बैच की IPS अधिकारी और लखनऊ क्राइम ब्रांच में तैनात एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने किया। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।

लखनऊ पुलिस की साइबर यूनिट लगातार ऐसे नेटवर्क की पहचान करने और उन पर कार्रवाई करने में जुटी है, जिनके जरिए लोगों को तकनीकी माध्यमों से निशाना बनाया जाता है।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बरामद सिम बॉक्स के पीछे कौन लोग काम कर रहे थे और इस नेटवर्क का इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। पुलिस की आगे की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

आम लोगों के लिहाज से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर ठगी का नेटवर्क अब केवल फर्जी लिंक या मैसेज तक सीमित नहीं रह गया है। कॉलिंग सिस्टम का दुरुपयोग करके भी लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में किसी अनजान कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना और निजी जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है।