लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में राज्य कर विभाग की टीम ने एक फर्जी फर्म सिल्वर एंटरप्राइजेज का भंडाफोड़ किया है। जांच में खुलासा हुआ कि फर्म ने कागजों पर पंजीकरण तो करा लिया, लेकिन जमीन पर उसका कोई अस्तित्व नहीं था। इस फर्जी फर्म के जरिए 2.16 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाला कर अन्य फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है। अब इस मामले में इंदिरानगर थाने में मुकदमा दर्ज हो गया है।
मिल रही जानकारी के मुताबिक, फर्म सिल्वर इंटरप्राइजेज का पंजीकरण मोहम्मद अब्दुल रहमान खलील के नाम से कराया गया था। पंजीकरण के दौरान बैंक खाता, मोबाइल नंबर, ईमेल और बिजली बिल जैसे दस्तावेज लगाए गए थे। लेकिन जब इन दस्तावेजों की जांच की गई तो बिजली बिल फर्जी निकला और मोबाइल नंबर भी बंद मिला था। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि राज्य कर विभाग की खंड-21 लखनऊ की टीम ने 17 जुलाई को फर्म के पते इंदिरानगर मेन रोड वसुंधरा एनक्लेव 19ए/5 पर छापेमारी की थी।
फर्जी टैक्सेबल इनवॉयस
जांच के दौरान मौके पर कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला और ना ही स्थानीय लोग उसके बारे में कोई जानकारी दे पाए। वहीं विभागीय जांच में सामने आया कि फर्म ने साल 2024-25 में कोई कारोबार नहीं दिखाया। लेकिन साल 2025-26 में करीब 18.85 करोड़ रुपये का फर्जी टैक्सेबल इनवॉयस दिखाकर लगभग 2.16 करोड़ रुपये का आईटीसी अन्य फर्मों को पास-ऑन कर दिया जोकि साफ रूप से कर चोरी और फर्जीवाड़ा है।
फर्म सिर्फ चोरी के लिए बनाया गया: राज्यकर के सहायक आयुक्त
राज्यकर के सहायक आयुक्त गौरव कुमार राजपूत ने अपनी शिकायत में कहा है कि फर्म पूरी तरह फर्जी है और इसे केवल कर चोरी के उद्देश्य से पंजीकृत कराया गया था। इस मामले में फर्म के स्वामी मोहम्मद अब्दुल रहमान खलील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। वहीं शिकायतकर्ता की तहरीर पर इंदिरानगर पुलिस ने मोहम्मद अब्दुल रहमान खलील के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस इसकी जांच में जुट गई है। बता दें, बोगस फर्म बनाकर टैक्स चोरी के पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
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