Majrooh Sultanpuri: आजकल के युवा और स्टैंडअप कॉमेडियन खुद को पता नहीं क्या समझने लगे हैं? उन्हें लगता है कि वे अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर वे कुछ भी कह सकते हैं और किसी के बारे में भी बुरा-भला कहकर माहौल बिगाड़ सकते हैं। हाल ही में समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट पर हुई बद्दतमीजी तो सभी ने देखी ही होगी। वीडियो भी काफी वायरल हुआ। इसके बाद रणवीर इलाहाबादिया की मुश्किलें बढ़ती ही चली गईं और उन पर अभी भी केस चल रहा है।
यही नहीं हाल ही में कुणाल कामरा ने भी महाराष्ट्र के एक नेता एकनाथ शिंदे पर कॉमेडी के जरिए हमला बोला। इसके बाद उन पर केस दर्ज हुआ और वे अभी फरार हैं। मुंबई पुलिस को उनकी तलाश है। बता दें कि ऐसा ही एक वाक्या उस समय पर हुआ, जब मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी ने चाचा नेहरू पर कविता के जरिए हमला वार किया था।
मजरूह सुल्तानपुरी को हुई थी जेल
साल 2022 में राज्यसभा में पीएम मोदी ने अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि था कि पीएम नेहरू के पीएम कार्यकाल में मजरूह सुल्तानपुरी को एक कविता लिखने पर जेल भेज दिया गया था। बात भारत के आजादी के कुछ समय बाद की है। बंबई में मजदूरों की एक हड़ताल में मजरूह सुल्तानपुरी ने एक ऐसी कविता पढ़ी कि नेहरू सरकार आग-बबूला हो गई। तत्कालीन गवर्नर मोरार जी देसाई ने मजरूह सुल्तानपुरी को ऑर्थर रोड जेल में डाल दिया। मजरूह सुल्तानपुरी को अपनी कविता के लिए माफी मांगने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जिसकी वजह से मजरूह सुल्तानपुरी को दो सालों तक जेल में ही गुजारना पड़ा।
कौन थे मजरूह सुल्तानपुरी?
मजरूह सुल्तानपुरी एक भारतीय उर्दू शायर, हिंदी फिल्मों के फेमस गीतकार और आंदोलनकारी थे। उनका नाम 20वीं सदी के उर्दू साहित्य जगह के बेहतरीन शायरों में गिना जाता है। सजा के दौरान मजरूह को बेटी हुई। परिवार भी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इसकी वजह से मजरूह साहब ने जेल से ही कुछ फिल्मों के लिए गीत लिखना स्टार्ट किया। 1951-52 के दौर में मजरूह जेल से बाहर आए और तब से लेकर 2000 तक मुसलसल फिल्मी गीत लिखते रहे। 24 मई 2000 को मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली।