ममता बनर्जी वकील बनीं, कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं: पोस्ट पोल वायलेंस PIL में उठाए गंभीर सवाल

ममता बनर्जी वकील बनीं, कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं: पोस्ट पोल वायलेंस PIL में उठाए गंभीर सवाल

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं। इस बार उन्होंने वकील का काला कोट पहन रखा था। चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के लिए वे कोर्ट पहुंची थीं। चीफ जस्टिस सुजॉय पाल इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ लाई है। आम नागरिक जो राज्य में कानून व्यवस्था, हिंसा और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं, उनके लिए यह सुनवाई महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य की स्थिरता और आम लोगों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

PIL में क्या-क्या मुद्दे उठाए ममता ने?

यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी के बेटे शिर्षान्या बनर्जी ने दायर की थी। शिर्षान्या उत्तरपारा से टीएमसी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं। सुनवाई के दौरान कोर्टरूम खचाखच भरा हुआ था।

ममता बनर्जी ने कोर्ट में कई गंभीर मुद्दे उठाए। इनमें चुनाव बाद हुई हिंसा, टीएमसी दफ्तरों पर हमले, कई लोगों का अभी भी अपने घरों में न लौट पाना, महिलाओं और बच्चों के साथ अभद्रता और मछली बाजार समेत विभिन्न इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई शामिल हैं। उन्होंने पुलिस की निष्क्रियता और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का भी मुद्दा उठाया।

सीनियर वकील विकास रंजन भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी के साथ ममता भी दलीलें पेश कर रही थीं। उनके हाथ में केस से संबंधित दस्तावेजों का बंडल था।

भवानीपुर चुनावी याचिका की अटकलें तेज

ममता बनर्जी की कोर्ट में इस उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। सियासी हलकों में सवाल उठने लगा है कि क्या वे भवानीपुर सीट से जुड़ी कोई चुनावी याचिका भी दायर करेंगी।

गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के समक्ष चुनावी याचिका दायर की थी। उनकी वकील के रूप में कोर्ट में सक्रिय भूमिका कई वर्षों बाद देखने को मिली है।

पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पर उठते सवाल

नई सरकार बनने के बाद राज्य के कई इलाकों में अवैध निर्माणों और दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई हो रही है। इस PIL में इन्हीं मुद्दों पर तुरंत सुनवाई की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की डिवीजन बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है।

ममता बनर्जी न सिर्फ एक अनुभवी राजनेता हैं बल्कि खुद एक वकील भी हैं। उनकी कोर्ट में उपस्थिति से साफ है कि वे पोस्ट पोल वायलेंस और प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर काफी गंभीर हैं।

आम पश्चिम बंगालवासी अब उम्मीद कर रहे हैं कि हाईकोर्ट इस मामले में उचित और समयबद्ध फैसला सुनाएगा, जिससे राज्य में शांति और कानून का राज स्थापित हो सके। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।