बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर पहली बार सीधे और गंभीर आरोप लगाए हैं। मायावती ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद का नगीना में कोई खास जनाधार नहीं था, इसके बावजूद वह चुनाव जीत गए। उन्होंने आरोप लगाया कि EVM में गड़बड़ी के जरिए उन्हें चुनाव जिताया गया और वह बीजेपी के इशारे पर काम करते हैं। हालांकि, ये मायावती के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
मायावती ने इस पूरे मुद्दे को EVM और चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं के भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि हर वोटर को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट उसी उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज और गिना गया है, जिसे उसने चुना है। उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में मौजूद आशंकाओं को दूर करने की मांग भी की।
EVM पर मायावती का पुराना विरोध फिर सामने आया
मायावती ने कहा कि BSP शुरू से ही EVM के जरिए मतदान का विरोध करती रही है। उनके मुताबिक, पार्टी ने EVM से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी थी।
मायावती ने VVPAT व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि VVPAT मशीन लगाए जाने के बावजूद सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं होती, इसलिए उनके मुताबिक इससे उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि मतदान लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल हिस्सा है। संविधान हर नागरिक को वोट देने का अधिकार देता है और अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।
मायावती के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें मतदाता को अपने वोट को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।
‘वोट किसी और के खाते में जाने का शक नहीं होना चाहिए’
BSP प्रमुख ने चुनावी प्रक्रिया में भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि मतदाता जिस उम्मीदवार या राजनीतिक दल को वोट देता है, उसका वोट उसी के पक्ष में गिना जाना चाहिए।
उनका कहना है कि अगर मतदाताओं के मन में यह आशंका पैदा होती है कि उनका वोट किसी दूसरे उम्मीदवार के खाते में चला गया या उसकी गिनती कहीं और हुई, तो इससे चुनाव प्रक्रिया पर विश्वास प्रभावित हो सकता है।
मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकती है। इसलिए चुनाव आयोग को मतदाताओं के बीच मौजूद भ्रम और आशंकाओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने बैलेट पेपर से होने वाले पुराने चुनावों का भी जिक्र किया। मायावती ने कहा कि देश में लंबे समय तक बैलेट पेपर से मतदान हुआ और मतदान के बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मतपत्र खोले और गिने जाते थे। बाद में EVM के जरिए मतदान की व्यवस्था लागू हुई।
BJP के पुराने EVM विरोध का मायावती ने किया जिक्र
मायावती ने अपने बयान में BJP के पुराने रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब BJP की ओर से भी EVM की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जाते थे।
मायावती के मुताबिक, उस समय BJP की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि EVM एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है और उसकी चिप को प्रभावित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में EVM को लेकर एक किताब प्रकाशित कर इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए थे।
मायावती का आरोप है कि बाद में सत्ता में आने के बावजूद BJP ने EVM व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इसे जारी रखा।
हालांकि, इस पूरे राजनीतिक दावे के अलग-अलग हिस्सों को उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। यहां मायावती ने BJP के पुराने रुख और मौजूदा व्यवस्था को लेकर अपनी राजनीतिक व्याख्या रखी है।
चंद्रशेखर आजाद पर सीधे आरोप, युवाओं को लेकर भी निशाना
सबसे तीखा हमला मायावती ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर किया। उन्होंने दावा किया कि चंद्रशेखर का नगीना क्षेत्र में मजबूत जनाधार नहीं था, फिर भी वह चुनाव जीत गए।
मायावती ने आरोप लगाया कि उनकी जीत में EVM से जुड़ी गड़बड़ी की भूमिका रही और बीजेपी ने उन्हें चुनाव जितवाया। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद को बीजेपी का एजेंट बताते हुए कहा कि वह पार्टी के इशारे पर काम करते हैं। यह भी मायावती का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
BSP प्रमुख ने चंद्रशेखर के धरना-प्रदर्शनों और अधिकारियों से मुलाकातों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि ऐसे प्रदर्शनों के कारण युवाओं पर मुकदमे दर्ज होते हैं और इसके बजाय युवाओं को न्याय दिलाने की कोशिश होनी चाहिए।
मायावती ने दलित समाज से भी चंद्रशेखर आजाद के प्रभाव में न आने की अपील की।
इस बयान के साथ मायावती ने एक तरफ EVM और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा उठाया है, तो दूसरी तरफ नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की राजनीतिक भूमिका पर सीधा हमला किया है। दोनों नेताओं के बीच यह सार्वजनिक टकराव उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
फिलहाल मायावती की ओर से लगाए गए EVM गड़बड़ी और बीजेपी से चंद्रशेखर आजाद के कथित संबंधों वाले आरोप राजनीतिक दावे हैं, न कि इस कॉपी में स्थापित तथ्य। इन दावों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड की स्थिति अलग से महत्वपूर्ण होगी।

