जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन से सबक लेना चाहिए और युवाओं की आवाज सुननी चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि जौहर विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थान को निशाना बनाना नफरत और बदले की राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में खड़े होने की भी अपील की।
क्या कहा महबूबा मुफ्ती ने?
महबूबा मुफ्ती ने अपने पोस्ट में लिखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से सीख लेनी चाहिए। उनके मुताबिक, देश का युवा नफरत और विभाजन की राजनीति को खारिज कर रहा है और सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने 15 जुलाई को मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण का कहना है कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और विकास प्राधिकरण की अनुमति के बिना किया गया।
हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि जब इन भवनों का निर्माण हुआ था, तब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। प्राधिकरण ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
आजम खान से जुड़ा है विश्वविद्यालय
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की पहल पर हुई थी। बाद के वर्षों में विश्वविद्यालय भूमि विवाद, अतिक्रमण और पट्टे की शर्तों के कथित उल्लंघन से जुड़े कई मामलों में घिर गया। उत्तर प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय की कई संपत्तियों पर पहले ही कब्जा ले चुकी है। इस साल की शुरुआत में आजम खान ने विश्वविद्यालय का संचालन करने वाली संस्था से खुद को अलग कर लिया था।
सपा ने भी उठाई आवाज
इस बीच समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचा और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ध्वस्तीकरण के आदेश को वापस लेने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों से मुलाकात की तथा कहा कि इस पूरे मामले से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भी अवगत कराया जाएगा।



