अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले 12 दिनों से जंग जारी है. ईरान अपने ऊपर हुए हमलों के जवाब में खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है. यह हमले मुख्य तौर से अमेरिकी बेसिस या उससे जुड़े ठिकानों पर हो रहे हैं. अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने और वहां यात्रा ना करने का नोटिस जारी किया. खुद पर हो रहे लगातार ईरानी हमलो के बाद भी GCC देश ईरान पर हमला नहीं कर रहे हैं और यहीं बात अमेरिका को खल रही है. अमेरिका ने रियाद में मौजूद अपने सैन्य बेस से सैनिकों को निकालना शुरू कर दिया है.
एक अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा अमेरिकी लोग मारे जा रहे हैं और अमेरिका उस आतंकवादी ईरानी शासन को हटाने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रहा है, जो इस इलाके के लिए खतरा बना हुआ है. वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब सिर्फ़ बयान जारी करता दिख रहा है और पर्दे के पीछे कुछ ऐसे काम कर रहा है जो नाममात्र की ही मदद करते हैं. लेकिन वह ईरान से फैल रहे आतंक के राज को खत्म करने के लिए सैन्य अभियानों में हिस्सा लेने को तैयार नहीं है.
अरब देशों से जंग में कूदने की अपील
लिंडसे ग्राहम ने आगे कहा उम्मीद है कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देश इस मामले में और ज्यादा सक्रिय होंगे, क्योंकि यह लड़ाई उनके अपने ही आंगन में लड़ी जा रही है. अगर आप अभी अपनी सेना का इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं, तो फिर कब करेंगे? उम्मीद है कि यह स्थिति जल्द ही बदलेगी. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.
जंग में शामिल होने पर क्या है अरब देशों का रुख?
अपने ऊपर लगातार हो रहे हमलों का बावजूद अरब देशों ने ईरान के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया है. सऊदी अरब ने हमलों की निंदा तो की है, लेकिन किसी भी सैन्य कार्रवाई करने से इंकार कर दिया है. वहीं ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने शनिवार को सरकारी टीवी पर आकर अरब देशों से माफी मांगी और कहा कि वह उन देशों पर हमला नहीं करना चाहते और आगे तब तक नहीं करेंगे जब उनके एयरस्पेस, लोकेशन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होगा. हालांकि ईरान के हमले अब भी जारी है, क्योंकि अमेरिका अपने अरब देशों के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल उसपे हमले करने के लिए कर रहा है.



