पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने वाली मुरादाबाद-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना अब जमीन पर उतरने लगी है। करीब 148.5 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के निर्माण के लिए प्रशासन ने मुरादाबाद जिले के 21 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने और भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए लिया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद न सिर्फ यात्रा का समय कम होगा, बल्कि उद्योग, व्यापार और कृषि क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
21 गांवों में रजिस्ट्री पर रोक क्यों लगाई गई?
हाईवे निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। प्रशासन का कहना है कि यदि इस दौरान जमीन की खरीद-बिक्री जारी रहती है, तो फर्जी रजिस्ट्रियों, अवैध निर्माण और मुआवजे से जुड़े विवाद पैदा हो सकते हैं।
इसी वजह से प्रभावित 21 गांवों में अस्थायी रूप से रजिस्ट्री और जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तय नियमों के तहत पूरी की जा सकेगी और पात्र किसानों को पारदर्शी तरीके से मुआवजा देने में आसानी होगी।
कैसा होगा नया ग्रीनफील्ड हाईवे, किस रूट से गुजरेगा?
करीब 148.5 किलोमीटर लंबा यह एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे पूरी तरह नई जमीन पर बनाया जाएगा। इसका निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कराएगा।
यह मार्ग मुरादाबाद के पाकबड़ा के पास दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से शुरू होकर कुंदरकी, सिरसी, बुलंदशहर होते हुए अलीगढ़ रिंग रोड तक पहुंचेगा।
इस हाईवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी एक्सेस कंट्रोल्ड व्यवस्था होगी। यानी वाहन केवल निर्धारित इंटरचेंज के जरिए ही हाईवे पर प्रवेश और निकास कर सकेंगे। गांवों, बाजारों या दुकानों से सीधे हाईवे पर चढ़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा दोपहिया और तिपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इससे यातायात अधिक सुरक्षित और बिना रुकावट के संचालित हो सकेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर बनेगा, यात्रा होगी तेज और सुरक्षित
एनएचएआई इस परियोजना का निर्माण गंगा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार करेगा। बेहतर सड़क डिजाइन, सुरक्षा बैरियर और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के कारण दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
हाईवे बनने के बाद लंबी दूरी के वाहनों को शहरों और कस्बों के भीतर से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और मुरादाबाद से अलीगढ़ तथा दिल्ली की यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।
पीतल उद्योग, किसानों और युवाओं को कैसे मिलेगा फायदा?
मुरादाबाद का पीतल और हस्तशिल्प उद्योग देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि नया हाईवे तैयार होने के बाद माल की ढुलाई तेज होगी, परिवहन लागत कम होगी और निर्यात कारोबार को नई गति मिलेगी।
व्यापारियों के अनुसार, अलीगढ़ और हाथरस से आने वाली अधूरी मूर्तियों की फिनिशिंग और पॉलिश का काम मुरादाबाद में होता है। बेहतर सड़क संपर्क से यह पूरी सप्लाई चेन पहले से ज्यादा तेज और किफायती हो जाएगी।
इस परियोजना का लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों को भी अपने कृषि उत्पाद कम समय में मंडियों और बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। इससे परिवहन खर्च घट सकता है और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे के दोनों ओर भविष्य में वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क, होटल, पेट्रोल पंप, औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक केंद्रों का विकास हो सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में निजी निवेश भी बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, मुरादाबाद-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योग, कृषि, व्यापार और परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके निर्माण कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है।



