इजराइल और ईरान के बीच जंग ने दुनिया भर में हंगामा मचा रखा है। इजराइल ने पहले ईरान के परमाणु ठिकानों पर धमाकेदार हमले किए, और यहीं से इस युद्ध की शुरुआत हुई। अब खबरें आ रही हैं कि इजराइल ने ये हमले सालों की तैयारी के बाद किए, और इसमें सबसे बड़ा रोल निभाया उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद ने। आइए, जानते हैं कि मोसाद ने ईरान में अब तक कौन-कौन से गजब के मिशन को अंजाम दिया।
मोसाद: दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी
मोसाद का नाम दुनिया की टॉप खुफिया एजेंसियों में शुमार है। 1949 में बनी इस एजेंसी ने नामुमकिन मिशनों को हकीकत में बदलकर अपनी धाक जमाई है। कहते हैं, मोसाद अपने दुश्मनों को सात समंदर पार से भी ढूंढ निकालती है। मोसाद की पूर्व रिसर्च डायरेक्टर सिमा शाइन समेत इजराइली अधिकारियों के हवाले से पता चला कि ईरान पर हालिया हमले की प्लानिंग तीन साल से चल रही थी। पिछले साल अक्टूबर 2024 में ईरान के एयर डिफेंस की कमजोरी पकड़ में आई, और फिर इजराइल ने मिशन को रफ्तार दे दी।
ड्रोन, AI और सटीक निशाने
मोसाद ने पहले ईरान में ड्रोन घुसपैठ कराई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से टारगेट चुने गए और डेटा प्रोसेसिंग से ये तय किया गया कि कौन-कौन इजराइल के लिए खतरा है। मोसाद ने ईरान के कई बड़े जनरलों और साइंटिस्ट्स की सटीक लोकेशन जुटाई। नतीजा? हमलों में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के चीफ जनरल हुसैन सलामी, ईरानी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मोहम्मद बाघेरी और मिसाइल प्रोग्राम के हेड समेत आठ बड़े अफसर ढेर हो गए।
पर्दे के पीछे की जासूस: कैथरीन की कहानी
इजराइल को ईरान के बड़े अफसरों की सटीक जानकारी यूं ही नहीं मिली। इसके पीछे थी मोसाद की एक महिला जासूस, कैथरीन पेरेजे शेकेड। कैथरीन ने शिया इस्लाम कबूल कर लिया और खुद को धार्मिक जिज्ञासु बताकर ईरानी अफसरों की पत्नियों से दोस्ती की। फिर वो उनके घरों में आने-जाने लगी और धीरे-धीरे अफसरों के बेडरूम तक पहुंच गई। कैथरीन ने अफसरों के ठिकानों की पक्की खबरें मोसाद को दीं। जब इजराइल ने हमला किया, तो हर निशाना बिल्कुल सटीक था। हमले के बाद कैथरीन की तस्वीरें अफसरों के साथ वायरल हुईं, लेकिन अब वो गायब है।
2018 में चुराए परमाणु दस्तावेज
इजराइल-ईरान जंग की नींव 2018 में ही पड़ गई थी। जनवरी 2018 की एक रात मोसाद के एजेंट तेहरान के एक गोदाम में घुसे, जहां ईरान के परमाणु दस्तावेज 32 भारी-भरकम तिजोरियों में रखे थे। ये तिजोरियां 2.7 मीटर ऊंची थीं, जिनमें दो लेयर के लोहे के दरवाजे, अलार्म और कैमरे थे। मोसाद ने कैमरे और अलार्म डिसेबल किए, और फोल्डर, सीडी, डीवीडी, कंप्यूटर डिस्क सब ले उड़े। रात में घुसे और सुबह 5 बजे तक सारा माल लेकर निकल गए।
इन दस्तावेजों में 55 हजार से ज्यादा पन्ने थे, जिनमें 8,500 हाथ से लिखे गए। इजराइल ने फारसी में लिखे इन कागजों का अनुवाद कराया, तो पता चला कि ईरान गुपचुप तरीके से 10 किलोटन के पांच परमाणु बम बनाने की फिराक में था। इसके बाद इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया को ये खुलासा किया।
मोसाद ने मारा ईरान के परमाणु प्रोग्राम का ‘पितामह’
2020 में मोसाद ने एक और बड़ा मिशन अंजाम दिया। ईरान के परमाणु प्रोग्राम के जनक साइंटिस्ट मोहसिन फखरीजादेह को बिना कोई एजेंट भेजे मार गिराया। फखरीजादेह को ईरान का ‘रॉबर्ट ओपेनहाइमर’ कहा जाता था। वो प्रोजेक्ट अमद के अगुआ थे, जिसके तहत 2000 के दशक में ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की थी। उनकी तस्वीर या इंटरव्यू तक पब्लिक में नहीं थे।
27 नवंबर 2020 को फखरीजादेह अपनी पत्नी और गार्ड्स के साथ तेहरान में अपने घर जा रहे थे। रास्ते में एक लावारिस ट्रक दिखा। जैसे ही उनका काफिला ट्रक के पास पहुंचा, उसमें लगी 7.62 एमएम की मशीन गन ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। ये मशीन गन AI और सैटेलाइट से जुड़ी थी, जिसे मोसाद ने दूर से कंट्रोल किया। 15 गोलियां चलीं, जो सिर्फ फखरीजादेह को लगीं, उनकी पत्नी को खरोंच तक नहीं आई। इसके बाद ट्रक में धमाका हुआ और सारे सबूत मिट गए। लेखक योनाह जेरेमी बॉब और इलान इवितार की किताब ‘टार्गेट तेहरान’ में इस ऑपरेशन का जिक्र है।
मोसाद के और कारनामे
मोसाद ने 2000 में Stuxnet वायरस भेजकर ईरान के परमाणु संयंत्रों को नुकसान पहुंचाया। 2024 में जुलाई में तेहरान में हमास नेता इस्माइल हनिया को मार गिराया। 2007 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म के एक्सपर्ट साइंटिस्ट अर्देशीर होसेनपोर की रहस्यमय मौत हुई। 2010 में क्वांटम फिजिक्स के प्रोफेसर मसूद अली मोहम्मदी को बाइक में बम से उड़ा दिया गया। 2010 में ही न्यूट्रॉन ट्रांसपोर्ट के जानकार माजिद शहरयारी की कार में बम से हत्या हुई। 2012 में यूरेनियम एनरिचमेंट पर काम करने वाले मोस्तफा अहमदी रोशन को भी बाइक में बम से मार डाला गया।



