बकरीद का त्योहार अब बस कुछ ही दिन दूर है। मुस्लिम समुदाय तैयारी में जुटा है, लेकिन मुंबई में इस बार खुले में कुर्बानी को लेकर राजनीति गरमा गई है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने मुंबई मेयर, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और पुलिस कमिश्नर से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि रिहायशी इलाकों, हाउसिंग सोसायटियों और चॉलों में बकरों की खुले में कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। इस मुद्दे ने आम नागरिकों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि यह स्वच्छता, कानून व्यवस्था और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा है।
किरीट सोमैया का सख्त रुख
बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट लिखा कि धार्मिक परंपरा के नाम पर रिहायशी परिसरों में खुले में जानवरों की कुर्बानी की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने मुंबई मेयर ऋतु राजेश तावड़े को पत्र भी लिखा है।
सोमैया ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अदालतों और नगर निगम के प्रतिबंधों के बावजूद नियमों की अनदेखी करते हैं। उन्होंने मांग की है कि मौजूदा वध कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। उनके अनुसार, आवासीय इलाकों के आसपास कुर्बानी प्रतिबंधित है और BMC को सभी वार्ड अधिकारियों को नए सिरे से सख्त निर्देश जारी करने चाहिए।
BMC की तैयारियां और व्यवस्था
बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने बकरीद को लेकर पहले ही व्यापक तैयारी कर ली है। देवनार बूचड़खाने में CCTV कैमरे, सुरक्षा बल, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाएं और सफाई व्यवस्था जैसी सुविधाएं जुटाई गई हैं।
17 मई से 30 मई तक देवनार में विशेष पशु बाजार लगेगा। इसके अलावा शहर में 109 जगहों पर धार्मिक कुर्बानी की अनुमति दी गई है। प्रशासन ने 24 घंटे कंट्रोल रूम, QR कोड आधारित पशु सत्यापन, अस्थायी शेड और 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की योजना बनाई है। MyBMC ऐप के जरिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की भी सुविधा शुरू की गई है। इस साल बकरीद 27 मई को मनाई जा सकती है, हालांकि तारीख चांद पर निर्भर करेगी।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
रिहायशी इलाकों में खुले में कुर्बानी से स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रहती है। कई परिवारों को इससे परेशानी होती है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को। दूसरी ओर, धार्मिक परंपरा का पालन करने वाले लोग भी अपने अधिकार की बात करते हैं।
किरीट सोमैया का यह पत्र शहर में कानून के शासन और व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है। अगर प्रशासन सख्ती बरतता है तो त्योहार के दौरान अनावश्यक विवाद और स्वास्थ्य जोखिम कम हो सकते हैं। साथ ही, निर्दिष्ट स्थानों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने से समुदाय को भी सुविधा मिलेगी।
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित और कानून सम्मत तरीके से काम करना जरूरी है। त्योहार का माहौल शांतिपूर्ण और स्वच्छ बना रहे, यही हर नागरिक की उम्मीद है। अब देखना होगा कि BMC और पुलिस प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है।


