NALSAR में उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग, NLSIU विवाद के बीच छात्रों ने दिखाई एकजुटता

NALSAR में उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग, NLSIU विवाद के बीच छात्रों ने दिखाई एकजुटता

हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में बुधवार शाम छात्रों के एक समूह ने जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। फिल्ममेकर ललित वचानी की डॉक्यूमेंट्री ‘Prisoner No. 626710 is Present’ की स्क्रीनिंग को आयोजकों ने उमर खालिद के साथ एकजुटता जताने की पहल बताया। खास बात यह रही कि कार्यक्रम का आयोजन छात्रों ने अपने स्तर पर किया। प्रोजेक्टर से लेकर स्क्रीनिंग के लिए जरूरी स्टैंड तक का इंतजाम भी उन्होंने खुद किया।

यह स्क्रीनिंग ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले बेंगलुरु की National Law School of India University (NLSIU) में इसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद सामने आया था। वहां एक छात्र समूह ने ‘Political Prisoners Day’ के मौके पर फिल्म दिखाने की योजना बनाई थी, लेकिन ABVP के विरोध के बाद स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई थी। ऐसे में NALSAR में हुई स्क्रीनिंग ने इस पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

छात्रों ने खुद किया स्क्रीनिंग का इंतजाम

NALSAR के छात्रों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के पीछे मकसद सिर्फ फिल्म दिखाना नहीं था। आयोजकों में से एक के मुताबिक, यह पहल उमर खालिद के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए की गई।

स्क्रीनिंग के लिए छात्रों ने खुद प्रोजेक्टर और स्टैंड का इंतजाम किया। उनका कहना था कि इस तरह की पहल दूसरी यूनिवर्सिटीज के छात्रों को भी प्रेरित कर सकती है कि वे दबाव के बीच अपनी बात रखने की कोशिश करें।

आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम का असर दूसरे कैंपस तक भी पहुंचेगा। हालांकि, उन्होंने जिस राजनीतिक संदर्भ में इसे रखा, वह देश में विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति और राजनीतिक मुद्दों पर बहस को लेकर चल रही चर्चा से जुड़ा है।

कौन हैं उमर खालिद और क्यों चर्चा में है मामला?

उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। वह 2019 में हुए CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय रहे थे। सितंबर 2020 से वह दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में UAPA के तहत हिरासत में हैं।

यही पृष्ठभूमि इस डॉक्यूमेंट्री को लेकर होने वाली स्क्रीनिंग को संवेदनशील बनाती है। फिल्म का नाम ‘Prisoner No. 626710 is Present’ है और इसे फिल्ममेकर ललित वचानी ने निर्देशित किया है।

NALSAR में इसकी स्क्रीनिंग को छात्रों ने एकजुटता की अभिव्यक्ति के तौर पर पेश किया। वहीं, दूसरी तरफ कुछ संस्थानों में इसी फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर विरोध और कानूनी पहलुओं पर सवाल उठे हैं।

NLSIU में क्यों रद्द हुई थी स्क्रीनिंग?

बेंगलुरु की NLSIU में एक छात्र समूह ने ‘Political Prisoners Day’ के मौके पर डॉक्यूमेंट्री दिखाने की योजना बनाई थी। लेकिन ABVP के विरोध के बाद कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

इसके बाद छात्र समूह ने दावा किया कि स्क्रीनिंग की योजना बनाने के कारण उन्हें गंभीर धमकियों का सामना करना पड़ा। समूह के मुताबिक, इसमें आपराधिक कार्रवाई की धमकी, डराने-धमकाने, डॉक्सिंग यानी निजी जानकारी सार्वजनिक करने और उत्पीड़न के दूसरे तरीकों की धमकियां शामिल थीं।

इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र गतिविधियों, अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर बहस को और चर्चा में ला दिया।

CBFC ने भी उठाया था स्क्रीनिंग पर सवाल

इस विवाद की एक और अहम कड़ी Central Board of Film Certification (CBFC) से जुड़ी है। इससे पहले CBFC ने Indian Institute of Information Technology Hyderabad (IIIT-H) को इस डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।

बोर्ड की ओर से कहा गया था कि ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग, जिसे CBFC ने अभी तक प्रमाणित नहीं किया है, Cinematograph Act के तहत उल्लंघन मानी जा सकती है, जब तक कि कानून के तहत कोई विशेष छूट लागू न हो।

ऐसे में NALSAR में हुई स्क्रीनिंग सिर्फ एक विश्वविद्यालय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह जाती। यह मामला छात्रों की कैंपस गतिविधियों, डॉक्यूमेंट्री की सार्वजनिक स्क्रीनिंग और मौजूदा कानूनी प्रावधानों के बीच संबंध को भी सामने लाता है। आम लोगों के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि विश्वविद्यालयों में होने वाली ऐसी घटनाएं अक्सर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत नियमों को लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन जाती हैं।