NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट में तनातनी, NTA का 2027 परीक्षा पर बड़ा फैसला टला

NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट में तनातनी, NTA का 2027 परीक्षा पर बड़ा फैसला टला

NEET यूजी परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक अहम हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उसने नीट री-एग्जाम के बाद ही आगे की रणनीति साफ करने की बात कही है। लाखों छात्र-छात्राओं के करियर से जुड़ा यह मुद्दा न सिर्फ मेडिकल प्रवेश की तैयारी करने वालों को चिंतित कर रहा है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है।

NTA का हलफनामा: 2027 का फैसला टला

NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट यूजी 2027 को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराया जाए या पेन-एंड-पेपर मोड में रखा जाए, यह फैसला अभी नहीं लिया जा सकता। एजेंसी का कहना है कि नीट री-एग्जाम पूरा होने के बाद हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) फिर से बैठक करेगी। इस बैठक में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय होगा।

यह जानकारी उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने लंबे समय से तैयारी की है। पहले सरकार और NTA ने साफ तौर पर ऐलान किया था कि 2027 की परीक्षा CBT मोड में होगी। लेकिन पेपर लीक की घटना के बाद अब यह मुद्दा टाल दिया गया है। इससे परीक्षा की तैयारी की रणनीति पर असर पड़ रहा है, क्योंकि CBT और पेन-पेपर दोनों मोड की तैयारी में काफी अंतर होता है।

सुरक्षा उपायों पर जोर, फिर भी सवाल बाकी

NTA के हलफनामे में 3 मई 2026 को हुए नीट यूजी 2026 एग्जाम से पहले की तैयारियों का भी जिक्र है। 17 अप्रैल 2026 को हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें परीक्षा केंद्रों पर CCTV सिस्टम की अनिवार्य जांच, फुटेज को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखने और फॉरेंसिक विश्लेषण की सिफारिश की गई थी।

ये कदम पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए थे, लेकिन घटना के बाद भी विवाद थमा नहीं। रद्द किए गए एग्जाम और री-एग्जाम की घोषणा के बाद अब पूरा सिस्टम फिर से परीक्षा की विश्वसनीयता साबित करने की चुनौती का सामना कर रहा है। आम छात्रों में यह आशंका है कि बार-बार बदलते फैसलों से उनकी मेहनत पर पानी फिर न जाए।

आगे क्या होगा, छात्रों पर असर

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई इस पूरे मामले को एक नई दिशा दे सकती है। NTA का हलफनामा दिखाता है कि एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन तत्काल कोई बड़ा बदलाव करने से बच रही है।

छात्रों के अभिभावक और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं। नीट जैसी परीक्षा न सिर्फ मेडिकल सीटों का दरवाजा खोलती है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और मेहनत का आधार भी होती है।

इस विवाद ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। NTA और सरकार को अब न सिर्फ इस मामले का समाधान निकालना है, बल्कि छात्रों का विश्वास भी वापस जीतना है।