नई दिल्ली: लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि अगले साल से NEET UG परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित फॉर्मेट यानी CBT मोड में आयोजित की जाएगी। साथ ही, इस साल की विवादित परीक्षा का री-एग्जाम 21 जून को होगा। सरकार का साफ संदेश है कि अब अनुचित साधनों से सफल होने की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
यह फैसला उन घटनाओं के बाद आया है जिन्होंने पूरे मेडिकल प्रवेश परीक्षा सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे। मई की शुरुआत में हुई NEET UG परीक्षा के बाद पेपर लीक की गंभीर शिकायतें सामने आईं। अभिभावक और छात्र सड़कों पर उतरे, मीडिया में बहस छिड़ी और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी।
पेपर लीक की जड़ पर प्रहार
शिक्षा मंत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए विस्तार से बताया कि 7 मई को लीक की चिंताएं उठने के बाद सरकार ने तुरंत आधिकारिक जांच शुरू की। 12 मई तक प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया कि प्रश्न पत्र ‘गेस पेपर’ नेटवर्क के माध्यम से लीक किया गया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने जोर देकर कहा कि सरकार योग्य और मेहनती छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देगी। जिन उम्मीदवारों ने ईमानदारी से तैयारी की है, उनकी मेहनत को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। री-एग्जाम में शामिल होने वाले छात्रों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा, जो उन्हें थोड़ी राहत देगा।
14 जून को इन छात्रों के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले से रजिस्टर्ड उम्मीदवारों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करने या अतिरिक्त फीस देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनके पुराने फॉर्म, चुने गए केंद्र और विवरण सीधे री-एग्जाम में मान्य होंगे।
CBT मोड क्यों जरूरी है?
सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में छात्र परीक्षा केंद्र पहुंचकर कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रश्न देखेंगे और माउस के जरिए उत्तर चुनेंगे। पेन-पेपर मोड की तुलना में यह तरीका कहीं अधिक पारदर्शी और सुरक्षित माना जाता है। प्रश्न पत्र छपने, उसे केंद्रों तक पहुंचाने और वापस लाने की पूरी प्रक्रिया में होने वाली कमजोरियों को इस फॉर्मेट में काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।
देश भर के मेडिकल aspirants के लिए यह बदलाव लंबे समय से मांगा जा रहा था। खासकर पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। अब सरकार का कहना है कि वह स्वच्छ, निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जो भी अनुचित साधन अपनाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा उन लाखों छात्रों को होगा जो साल भर जंग-जैसे माहौल में तैयारी करते हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन होगा। री-एग्जाम की तैयारी में लगे छात्रों को अतिरिक्त समय मिलने से थोड़ी मानसिक राहत भी मिलेगी।
हालांकि, CBT मोड में बदलाव के साथ छात्रों को कंप्यूटर पर परीक्षा देने की आदत डालनी होगी। कई स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में पहले से ही मॉक टेस्ट इस फॉर्मेट में कराए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को इस बदलाव के लिए थोड़ी अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ सकती है।
शिक्षा मंत्री का यह ऐलान सिर्फ एक परीक्षा सुधार नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। अब देखना यह होगा कि आगामी महीनों में NTA इस घोषणा को किस तरह जमीन पर उतारता है और छात्रों का विश्वास कितना बहाल होता है।


