NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों को मिले सुराग अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पेपर यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा था। यश की पहचान विकास बिवाल से बताई जा रही है। विकास के पिता दिनेश बिवाल पर आरोप है कि उन्होंने पेपर की हार्डकॉपी स्कैन करके पीडीएफ तैयार की और इसे सीकर के कोचिंग संस्थानों तक पहुंचाया गया।
यह खबर उन लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिन्होंने NEET की तैयारी में सालों की मेहनत और लाखों रुपये लगाए। पेपर लीक जैसी घटना न सिर्फ मेधावी छात्रों का भविष्य प्रभावित करती है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर देती है।
पैसे का लेन-देन और मास्टरमाइंड का राज
जांच में सामने आया है कि छात्रों से पेपर हासिल करने के लिए 2 लाख से 5 लाख रुपये तक वसूले गए। यश यादव खुद BAMS का छात्र है और परीक्षा पास नहीं कर सका था। शुभम नाम के एक आरोपी ने खुद को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताने से इनकार कर दिया है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब मनी ट्रेल पर पूरा फोकस कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर असल में कहां से लीक हुआ और पैसे किसके खातों में गए। कोचिंग संस्थानों के स्टाफ और मालिकों से लंबी पूछताछ की जा रही है। छात्रों और गिरफ्तार व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
नासिक कंसल्टेंसी का कनेक्शन, शिक्षा का कारोबार
महाराष्ट्र के नासिक से इस मामले में नया मोड़ आया है। मुख्य आरोपी शुभम खैरनार का ‘SR Education Consultancy’ नाम का संस्थान है, जो पॉश कनाडा कॉर्नर इलाके में स्थित है। यह कंसल्टेंसी पिछले 2-3 साल से MBBS, BAMS, BHMS और इंजीनियरिंग जैसे कोर्सेस में एडमिशन के लिए छात्रों को गाइडेंस दे रही थी।
संस्थान रजिस्ट्रेशन से लेकर एडमिशन तक की पूरी प्रक्रिया में मदद करता था। मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को छूट भी दी जाती थी। सोशल मीडिया पर भारी प्रमोशन और ब्रांडिंग के जरिए यह संस्थान काफी चर्चित था। राजस्थान पुलिस की जांच में नासिक का यह कनेक्शन सामने आने के बाद पूरे मामले में और खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक की घटना न सिर्फ छात्रों के भरोसे को तोड़ती है, बल्कि देश की चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा करती है। जो छात्र साल भर रात-दिन मेहनत करते हैं, उनके लिए यह बेहद निराशाजनक है।
जांच एजेंसियां अब पेपर के असली सोर्स और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल यह साफ है कि यह कोई छोटा मामला नहीं है, बल्कि कोचिंग संस्थानों, कंसल्टेंसी और गिरोह का एक संगठित नेटवर्क इसमें शामिल दिख रहा है।
आम अभिभावक और छात्र अब उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और दोषियों को सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


