Nifty 50 की नई छलांग: क्या इस हफ्ते छुएगा अपना ऑल-टाइम हाई? इन 6 फैक्टर पर टिकी निगाहें

Nifty 50 की नई छलांग: क्या इस हफ्ते छुएगा अपना ऑल-टाइम हाई? इन 6 फैक्टर पर टिकी निगाहें

भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते एक नया इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है. पिछले हफ्ते लगातार छह दिनों की शानदार तेजी के बाद, शुक्रवार को निवेशकों ने मामूली मुनाफावसूली की, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स अपने शिखर से थोड़ा नीचे आ गए. लेकिन यह ठहराव एक बड़े तूफान से पहले की शांति हो सकता है. बाजार विशेषज्ञों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या निफ्टी 50 इस हफ्ते अपनी सर्वकालिक ऊंचाई (all-time high) के पार जा पाएगा. ऐसा लगता है कि बाजार का मिजाज काफी सकारात्मक है और इसके पीछे 6 ठोस कारण हैं, जो तेजी के इस माहौल को और मजबूत कर सकते हैं. वैश्विक संकेतों से लेकर घरेलू नतीजों तक, सब कुछ बाजार की एक नई छलांग की ओर इशारा कर रहा है.

शुक्रवार को सेंसेक्स 344 अंक गिरकर 84,211.88 पर और निफ्टी 50, 0.37% फिसलकर 25,795.15 पर बंद हुआ था. यह गिरावट मुख्य रूप से एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में दबाव के कारण आई. लेकिन इस नए हफ्ते की शुरुआत एक नई उम्मीद के साथ हो रही है. आइए उन छह फैक्टर पर नजर डालते हैं जो इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करेंगे.

विदेशी निवेशकों की वापसी

बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण अमेरिका से आ रहा है. शुक्रवार को जारी हुए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम आए हैं. इससे यह उम्मीद बेहद मजबूत हो गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व, 28 अक्टूबर से शुरू हो रही अपनी बैठक में ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है. बाजार तो दिसंबर और जनवरी में भी कटौती की उम्मीद लगा बैठा है.

यह भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है. जब भी अमेरिका में ब्याज दरें घटती हैं, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे बाजारों में जमकर पैसा लगाते हैं, क्योंकि उन्हें यहां ज्यादा रिटर्न मिलता है. FIIs का रुख बदलना भारत के लिए बहुत अहम है. पिछले कई महीनों से लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी निवेशक अब रुकते नजर आ रहे हैं. 24 अक्टूबर को, FIIs ने 621 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. यह एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण संकेत है. हालांकि, इस पूरे साल FIIs ने 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी करके बाजार को संभाले रखा. अब अगर FIIs भी खरीदारी शुरू कर देते हैं, तो बाजार को दोगुना समर्थन मिल जाएगा.

वैश्विक व्यापार समझौते

वैश्विक मंच पर भी कई ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा. पहली, भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की खबरें हैं. अगर यह समझौता होता है, तो भारतीय निर्यातों पर लगे 50% तक के भारी टैरिफ में राहत मिल सकती है. यह टैरिफ भारत द्वारा रूसी तेल आयात के जवाब में लगाए गए थे. हालांकि, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया है कि भारत किसी भी प्रतिबंधात्मक शर्त वाले सौदे में जल्दबाजी नहीं करेगा.

इसी से जुड़ा है कच्चे तेल का मुद्दा. रूस के तेल पर नए अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 5% उछल गई हैं. इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है. भारतीय रिफाइनरियां भी अब इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए रूस से तेल आयात घटाने की तैयारी कर रही हैं. यह कदम अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में तो मदद करेगा, लेकिन भारत का आयात बिल बढ़ा सकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती होगी.

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात पर भी बाजार की नजर है. विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस बार नरम रुख अपना सकता है, क्योंकि ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के मामले में चीन का पलड़ा भारी है, जो ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद जरूरी हैं. इन व्यापारिक तनावों में कोई भी कमी दुनिया भर के बाजारों में सकारात्मक माहौल पैदा करेगी.

कंपनियों के दमदार नतीजे

विदेशी संकेतों के अलावा, बाजार को असली ताकत घरेलू कंपनियों के प्रदर्शन से मिल रही है. कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे अब तक उम्मीद से बेहतर आए हैं. इस हफ्ते निवेशकों की खास नजर डिफेंस सेक्टर पर रहेगी. मझगांव डॉक और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) अपने नतीजे जारी करने वाले हैं. सरकार से मिल रहे बड़े ऑर्डर और नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर सभी का ध्यान होगा. निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स इस साल 2025 में अब तक 26% का जबरदस्त उछाल दिखा चुका है, जो इसे टॉप परफॉर्मिंग सेक्टर्स में से एक बनाता है.

डिफेंस के अलावा, इस हफ्ते कोटक महिंद्रा बैंक, पीएनबी हाउसिंग, आईओसी, कोल इंडिया, अडानी पावर, डाबर, डीएलएफ, आईटीसी, मणप्पुरम फाइनेंस, भेल (BHEL) और एनटीपीसी जैसी कई बड़ी कंपनियों के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

कुल मिलाकर, बाजार एक बहुत ही रोमांचक मोड़ पर है. शुक्रवार को जो गिरावट आई, वह छह दिनों की तेजी के बाद एक स्वाभाविक मुनाफावसूली थी. लेकिन इस हफ्ते के लिए बिसात बिछ चुकी है. अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व उम्मीद के मुताबिक नरम रुख अपनाता है, व्यापार समझौतों पर सकारात्मक खबरें आती हैं और घरेलू कंपनियों के नतीजे दमदार रहते हैं, तो निफ्टी 50 को नया कीर्तिमान बनाने से कोई नहीं रोक सकता.