भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी पहली राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है और इस सूची ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब अनुभव और नई पीढ़ी के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है। 65 सदस्यीय इस नई टीम में कई अनुभवी नेताओं को उनकी जिम्मेदारियों पर बरकरार रखा गया है, वहीं संगठन के अलग-अलग स्तरों पर बड़ी संख्या में नए चेहरों को मौका मिला है। खास तौर पर राष्ट्रीय सचिवों, मोर्चों और मीडिया-सोशल मीडिया इकाइयों में हुए बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पार्टी संगठन को नए ढांचे के साथ आगे ले जाना चाहती है।
करीब 50 साल की औसत उम्र वाली यह टीम बताती है कि बीजेपी ने न तो पूरी तरह पुराने चेहरों पर भरोसा किया है और न ही पूरी तरह नई टीम बनाई है। इसके बजाय संगठनात्मक निरंतरता बनाए रखते हुए नई ऊर्जा जोड़ने की कोशिश की गई है।
8 महामंत्रियों में 6 नए चेहरे, अनुभवी नेताओं पर भी भरोसा
राष्ट्रीय महामंत्री स्तर पर इस बार सबसे अहम बदलाव देखने को मिला। कुल आठ महामंत्रियों में छह नए चेहरे शामिल किए गए हैं। नई जिम्मेदारी पाने वालों में स्मृति ईरानी, विप्लव देव, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया शामिल हैं।
वहीं संगठन के दो महत्वपूर्ण और अनुभवी नेताओं सुनील बंसल और विनोद तावड़े को उनके पद पर बरकरार रखा गया है। इससे साफ है कि पार्टी नए नेतृत्व को आगे लाने के साथ उन चेहरों को भी बनाए रखना चाहती है जो लंबे समय से संगठन की रणनीति का हिस्सा रहे हैं।
संगठन के सबसे अहम पद पर बी.एल. संतोष राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बने हुए हैं। उनके साथ शिवप्रकाश सह-संगठन महामंत्री के पद पर कायम हैं, जबकि सौदान सिंह की सह-संगठन महामंत्री के रूप में वापसी हुई है।
राष्ट्रीय सचिवों में सबसे बड़ा बदलाव, 16 में 14 नए चेहरे
अगर पूरी सूची में सबसे बड़ा बदलाव किसी स्तर पर दिखाई देता है तो वह राष्ट्रीय सचिवों की टीम है। कुल 16 राष्ट्रीय सचिव बनाए गए हैं, जिनमें 14 नए चेहरे शामिल हैं। यानी करीब 87 फीसदी सचिव पहली बार इस जिम्मेदारी तक पहुंचे हैं।
नई सूची में कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, डॉ. भोला सिंह, डॉ. प्रदीप वर्मा, डॉ. संदीप पाठक, संगीता यादव, मनोज तिग्गा, सिद्धार्थ शंभू, डॉ. स्वदेश सिंह, रोहन गुप्ता और जय प्रकाश जैसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं फांग्नोन कोन्याक और अनिल एंटनी को उनके पद पर बरकरार रखा गया है। यह बदलाव बताता है कि संगठन के मध्य स्तर पर नई पीढ़ी को तेजी से आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है।
महिलाओं को मिली मजबूत हिस्सेदारी, यूपी सबसे आगे
नई राष्ट्रीय टीम में 12 महिलाओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। 65 सदस्यीय टीम में यह लगभग 18.5 फीसदी प्रतिनिधित्व है, जो महिला भागीदारी बढ़ाने की कोशिश को दर्शाता है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वसुंधरा राजे, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन दोशी, डॉ. भारती पवार और डॉ. मधुचंद्र कर को जगह मिली है। वहीं स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।
राष्ट्रीय सचिवों में कविता पाटीदार, फांग्नोन कोन्याक और संगीता यादव शामिल हैं। रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि प्रीति गांधी को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। महिला प्रतिनिधित्व के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां से रेखा वर्मा, स्मृति ईरानी और संगीता यादव को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।
सभी सात मोर्चों से लेकर मीडिया टीम तक बड़ा फेरबदल
बीजेपी ने इस बार अपने सभी सात मोर्चों के अध्यक्ष बदल दिए हैं। युवा मोर्चा की कमान डॉ. हेमांग जोशी, किसान मोर्चा की बंसीलाल गुर्जर, ओबीसी मोर्चा की अमरपाल मौर्य, एससी मोर्चा की शिवेश कुमार राम, एसटी मोर्चा की डॉ. मन्नालाल रावत, महिला मोर्चा की रूप कुमारी चौधरी और अल्पसंख्यक मोर्चा की जिम्मेदारी कुंवर बासित अली को सौंपी गई है।
मीडिया और सोशल मीडिया टीम में भी बड़ा बदलाव हुआ है। अनिल बलूनी अपनी भूमिका में बने हुए हैं, लेकिन उनके साथ सह-प्रभारी रहे संजय मयूख की जगह अब आशीष अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।
सबसे चर्चित बदलाव सोशल मीडिया इकाई में हुआ, जहां अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है। उनके साथ प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली है।
इसके अलावा पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि राजेश मंगल सह-कोषाध्यक्ष बने हैं। वहीं तरुण चुघ को राष्ट्रीय महामंत्री की भूमिका से हटाकर पार्टी मुख्यालय का प्रभारी बनाया गया है।
पूरी सूची का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बीजेपी ने संगठन में व्यापक बदलाव करते हुए अनुभव और नई पीढ़ी के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है। 6 नए महामंत्री, 14 नए राष्ट्रीय सचिव, सभी सात मोर्चों के नए अध्यक्ष और महिला प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी इस बात का संकेत हैं कि पार्टी आने वाले समय के लिए संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार कर रही है।


