नोएडा में बनेगा 29 KM का नया एक्सप्रेसवे, 5 लाख लोगों को सीधा फायदा, एयरपोर्ट की दूरी होगी करीब 30 KM

नोएडा में बनेगा 29 KM का नया एक्सप्रेसवे, 5 लाख लोगों को सीधा फायदा, एयरपोर्ट की दूरी होगी करीब 30 KM

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए एक नई सड़क कनेक्टिविटी विकसित करने की तैयारी है। यमुना-हरनंदी डूब क्षेत्र में करीब 29 किलोमीटर लंबा चार लेन एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से करीब 5 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे अहम बात यह है कि नई कनेक्टिविटी तैयार होने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच भी आसान होगी और इसकी दूरी करीब 30 किलोमीटर रह जाएगी।

नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस परियोजना के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है। तेजी से बढ़ते आवासीय और व्यावसायिक विकास के बीच शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर पीक ऑवर में ट्रैफिक का दबाव ज्यादा रहता है। ऐसे में प्रस्तावित नया मार्ग मौजूदा एक्सप्रेसवे के लिए एक वैकल्पिक कनेक्टिविटी के तौर पर काम कर सकता है।

सेक्टर-135 से 150 तक बनेगा नया चार लेन कॉरिडोर

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की शुरुआत यमुना तटबंध के रास्ते सेक्टर-135 से सेक्टर-150 के बीच होगी। आगे इसे कुंडली बांगर की तरफ से आने वाली 75 मीटर चौड़ी सड़क से जोड़ा जाएगा। इसके बाद यह मार्ग यमुना एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी से जुड़ जाएगा।

इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल सकता है जो ग्रेटर नोएडा के यमुना किनारे विकसित हो रहे इलाकों से नोएडा की तरफ रोजाना आवाजाही करते हैं। अभी इन क्षेत्रों से आने-जाने के लिए सीमित प्रमुख मार्गों पर निर्भरता रहती है। नया कॉरिडोर तैयार होने पर एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा।

परियोजना में यमुना डूब क्षेत्र के करीब 1 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में विकसित करने की योजना है। वहीं, हरनंदी डूब क्षेत्र के लगभग 17 किलोमीटर हिस्से को भी चार लेन मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा।

किसानों की जमीन अधिग्रहण की जरूरत कम, पहले से मौजूद जमीन का होगा इस्तेमाल

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू जमीन से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बड़े पैमाने पर किसानों की जमीन के अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास संबंधित क्षेत्र में पहले से करीब 22 से 28 मीटर चौड़ी जमीन उपलब्ध है। इसी जमीन का इस्तेमाल नई कनेक्टिविटी विकसित करने में किया जाएगा। इससे परियोजना को जमीन अधिग्रहण से जुड़ी संभावित अड़चनों से बचाने में मदद मिल सकती है।

शहर के इस हिस्से में पिछले कुछ समय से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सड़क नेटवर्क को पहले से मजबूत करना आने वाले ट्रैफिक दबाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

25 सेक्टर, 20 गांव और 75 सोसायटियों को मिलेगा फायदा

नई सड़क का असर नोएडा के बड़े हिस्से पर पड़ने की उम्मीद है। सेक्टर-94, 124 से 135, 150 से 159, 163, 164 और 168 समेत करीब 25 सेक्टर इस कनेक्टिविटी से प्रभावित होंगे।

इसके अलावा रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर, जहांगीर, सुल्तानपुर, शाहपुर, गोवर्धनपुर, नगला नगली, रोहिल्लापुर, मंगरौली, मोहियापुर, बदोली, झट्टा, गुलावली और मोमनाथल समेत करीब 20 गांवों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

यमुना किनारे करीब 75 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां भी तेजी से विकसित हो रही हैं। इन इलाकों में आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क नेटवर्क पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में नया चार लेन मार्ग स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकता है।

11.2 KM का तटबंध एक्सप्रेसवे पहले से मौजूद

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश के मुताबिक, यमुना तटबंध पर पहले से 11.2 किलोमीटर लंबा चार लेन एक्सप्रेसवे मौजूद है। इसके नवीनीकरण पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें से करीब 11 करोड़ रुपये का फंड जारी किया जा चुका है।

प्राधिकरण का मानना है कि तटबंध के विस्तार और नई कनेक्टिविटी से केवल ट्रैफिक मैनेजमेंट में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि यमुना किनारे के इलाकों में विकास की रफ्तार भी बढ़ सकती है।

आम लोगों के लिए इसका सबसे बड़ा असर रोजाना के सफर में देखने को मिल सकता है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव घटने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग से यात्रा का विकल्प मिलेगा। वहीं, यमुना किनारे विकसित हो रहे सेक्टरों और गांवों को शहर के दूसरे हिस्सों से बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

कुल मिलाकर, 29 किलोमीटर का यह प्रस्तावित चार लेन एक्सप्रेसवे नोएडा के तेजी से बदलते शहरी ढांचे में एक नई कनेक्टिविटी जोड़ने की योजना है। खासकर उन इलाकों के लिए जहां आने वाले समय में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी को एक अतिरिक्त सड़क विकल्प मिल सकेगा।