Noida-Greater Noida Link Road: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच ट्रैफिक दबाव कम करने वाली प्रस्तावित लिंक रोड परियोजना एक बार फिर अटक गई है। LG गोल चक्कर से शारदा गोल चक्कर होते हुए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली इस सड़क के लिए सिंचाई विभाग की NOC अभी नहीं मिली है।
सिंचाई विभाग ने बांध की सुरक्षा और बाढ़ के दौरान पानी के बहाव पर संभावित असर को लेकर निर्माण से पहले हाइड्रोलॉजिकल स्टडी जरूरी बताई है। इसी के चलते फिलहाल परियोजना की रफ्तार थमी हुई है।
IIT रुड़की करेगी हाइड्रोलॉजिकल स्टडी
प्रस्तावित लिंक रोड के रास्ते में बांध का हिस्सा आ रहा है। ऐसे में सड़क और पुल निर्माण के बाद भारी बारिश या बाढ़ के दौरान पानी के बहाव पर क्या असर पड़ेगा, इसकी वैज्ञानिक जांच की जा रही है।
इसके लिए IIT रुड़की से हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराई जा रही है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे सिंचाई विभाग को सौंपा जाएगा। इसके आधार पर NOC मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
10 से 12 KM तक कम हो सकती है दूरी
लिंक रोड तैयार होने के बाद वाहन चालकों को मौजूदा रास्ते की तुलना में करीब 10 से 12 किलोमीटर तक कम सफर करना पड़ सकता है। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होने की उम्मीद है।
इस सड़क का फायदा ग्रेटर नोएडा वेस्ट, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और दादरी की तरफ आने-जाने वाले लोगों को मिल सकता है।
परी चौक के ट्रैफिक को भी राहत की उम्मीद
परियोजना पूरी होने पर परी चौक और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। खासकर पीक आवर्स में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले वाहनों को एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
हालांकि, सिंचाई विभाग की चिंता यह है कि बांध के पास एलिवेटेड रोड या पुल बनने से बाढ़ के समय पानी के बहाव और बांध की संरचना पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से निर्माण से पहले तकनीकी अध्ययन को जरूरी माना गया है।
अब रिपोर्ट और NOC पर टिकी परियोजना
जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह के मुताबिक, IIT की रिपोर्ट और जरूरी NOC मिलने के बाद पुल का निर्माण आगे बढ़ाया जा सकेगा। फिलहाल लिंक रोड परियोजना का अगला चरण हाइड्रोलॉजिकल स्टडी और सिंचाई विभाग की मंजूरी पर निर्भर है।




