प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा एक्शन! दिल्ली में 62 नहीं, अब ₹35 किलो मिलेगा प्याज, जानें कहां-कहां होगी बिक्री

प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा एक्शन! दिल्ली में 62 नहीं, अब ₹35 किलो मिलेगा प्याज, जानें कहां-कहां होगी बिक्री

दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सरकार ने राहत का कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार से राजधानी में 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू कर दी है। बाजार में जहां प्याज करीब 62 रुपये किलो बिक रहा है, वहीं सरकारी बिक्री में इसकी कीमत करीब 44 फीसदी कम रखी गई है। सरकार का कहना है कि देश में प्याज की कमी नहीं है। इसके बावजूद कीमतों में तेजी का असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े, इसके लिए बफर स्टॉक को बाजार में उतारा जा रहा है।

उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने खुदरा बिक्री की शुरुआत की। इस दौरान प्याज लेकर जा रहे छोटे ट्रकों को हरी झंडी दिखाई गई। सरकार का यह हस्तक्षेप ऐसे समय हुआ है जब त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ प्याज की मांग बढ़ने की संभावना रहती है।

दिल्ली में 62 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो

सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर दिल्ली के बाजार में बेच रही है। मौजूदा बाजार कीमत करीब 62 रुपये प्रति किलो बताई गई है। इसके मुकाबले 35 रुपये किलो की सरकारी बिक्री उपभोक्ताओं को सीधे राहत देने वाली है।

सरकार के मुताबिक, कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की वजह कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी बताई गई है। हालांकि, देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर सरकार ने किसी तरह की चिंता नहीं जताई है।

खास बात यह है कि सरकार ने फिलहाल प्याज के निर्यात पर रोक लगाने की योजना से भी इनकार किया है। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे के मुताबिक, जब घरेलू आपूर्ति पर्याप्त है तो निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है।

आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच देश से करीब 3.82 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ है।

NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार संभालेंगे बिक्री

सरकारी प्याज को लोगों तक पहुंचाने के लिए कई बिक्री चैनल इस्तेमाल किए जा रहे हैं। NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के जरिए खुदरा बिक्री होगी। इसके अलावा मदर डेयरी भी अपने सफल स्टोर के माध्यम से प्याज उपलब्ध कराएगी।

सरकार सिर्फ दुकानों के जरिए आपूर्ति बढ़ाने पर निर्भर नहीं है। प्याज को तेजी से दिल्ली पहुंचाने के लिए रेलवे का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके लिए ‘कंदा एक्सप्रेस’ नाम से समर्पित रेलवे रैक के जरिए प्याज भेजा जा रहा है। पहला रैक नासिक से दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है। इसमें करीब 800 टन प्याज है और इसके गुरुवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।

सरकार का मानना है कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी।

उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं, बफर स्टॉक भी तैयार

प्याज की कीमतों पर दबाव के बीच उत्पादन के आंकड़े भी सरकार के पक्ष में हैं। वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल यह आंकड़ा 307.67 लाख टन था। यानी उत्पादन में मामूली कमी है, लेकिन कोई बड़ी गिरावट नहीं बताई गई है।

सरकार ने बफर स्टॉक के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज खरीदा है। इसी स्टॉक का इस्तेमाल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है।

सरकार का तर्क है कि मजबूत उत्पादन, पर्याप्त बफर और बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप से आने वाले महीनों में आपूर्ति बनी रहेगी। इससे मौसमी तौर पर कीमतों में आने वाले दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

त्योहारों से पहले सरकार की नजर, किसानों और ग्राहकों दोनों पर फोकस

प्याज की कीमतों में त्योहारों के आसपास तेजी आना कोई नया पैटर्न नहीं है। ओणम, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली के साथ-साथ शादी के सीजन में मांग बढ़ती है। ऐसे में सरकार पहले से आपूर्ति पर नजर रख रही है।

उपभोक्ता मामले विभाग राज्यों में प्याज की कीमतों की लगातार निगरानी कर रहा है। विभाग आवक और उपलब्धता का भी आकलन कर रहा है। जरूरत पड़ने पर सरकार अतिरिक्त कदम उठाने की बात कह चुकी है, ताकि अनुचित तरीके से कीमतों में बढ़ोतरी न हो।

इस बार भंडारण व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। 2026-27 के लिए सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) को पहली बार प्याज बफर के लिए स्टोरेज एजेंसी बनाया गया है।

कुल मिलाकर सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उपभोक्ताओं को महंगे प्याज से राहत देनी है, तो दूसरी तरफ किसानों के हितों को भी सुरक्षित रखना है। दिल्ली में 35 रुपये किलो की बिक्री इसी बाजार हस्तक्षेप का हिस्सा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकारी बिक्री बढ़ने के बाद खुदरा बाजार में प्याज की कीमत कितनी जल्दी नीचे आती है और त्योहारी मांग के दौरान यह राहत कितनी टिकती है।