प्याज की कीमतों पर सरकार का बड़ा दांव, ‘कांदा एक्सप्रेस’ फिर दौड़ी; ₹35 किलो में मिलेगा प्याज

प्याज की कीमतों पर सरकार का बड़ा दांव, ‘कांदा एक्सप्रेस’ फिर दौड़ी; ₹35 किलो में मिलेगा प्याज

प्याज की कीमत बढ़ते ही सबसे पहले असर आम घर के बजट पर दिखाई देता है। ऐसे में आने वाले महीनों में प्याज महंगा न हो, इसके लिए सरकार ने सप्लाई बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार बाजार पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत के हिसाब से बफर स्टॉक बाजार में उतारने के साथ ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए प्याज की ढुलाई कर रही है। लक्षित खुदरा बिक्री के जरिए उपभोक्ताओं को करीब ₹35 प्रति किलो की दर पर प्याज उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने में बड़ी दिक्कत की आशंका नहीं है। सरकार का जोर एक तरफ उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ी कीमतों से राहत देने पर है, तो दूसरी तरफ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने पर भी है।

उत्पादन लगभग पिछले साल जितना, फिर कीमत पर नजर क्यों?

वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। पिछले साल यह करीब 307.67 लाख मीट्रिक टन था। यानी उत्पादन में कोई बड़ा अंतर नहीं है।

इसके बावजूद अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसम और सप्लाई चेन में होने वाले बदलाव जैसे कारण हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार इस बार पहले से बाजार की स्थिति पर नजर रख रही है।

सरकार के पास बफर स्टॉक भी मौजूद है। कीमतों में जरूरत से ज्यादा तेजी आने पर इसी स्टॉक का इस्तेमाल बाजार में अतिरिक्त प्याज पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।

‘कांदा एक्सप्रेस’ से कम खर्च में पहुंचेगा प्याज

प्याज की कीमत नियंत्रित रखने की रणनीति में ‘कांदा एक्सप्रेस’ अहम भूमिका निभा रही है। इसके तहत रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज को प्रमुख उपभोग केंद्रों तक भेजा जाता है।

रेल परिवहन से एक साथ बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाना संभव होता है। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने और सप्लाई को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

2024-25 में इस पहल के तहत 14 रेलवे रैक के जरिए करीब 12,000 मीट्रिक टन प्याज पांच शहरों तक पहुंचाया गया था। अगले साल इसका दायरा काफी बढ़ा। 2025-26 में 86 रेलवे रैक के जरिए लगभग 88,000 मीट्रिक टन प्याज देश के 16 प्रमुख शहरों तक भेजा गया।

इस अनुभव के बाद सरकार ने इस व्यवस्था को फिर सक्रिय किया है।

24 अगस्त से फिर शुरू हुई ढुलाई, इन शहरों पर फोकस

पिछले साल के अनुभव को देखते हुए 24 अगस्त से नासिक से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की ढुलाई दोबारा शुरू कर दी गई है। साथ ही बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री भी फिर शुरू की गई है।

शुरुआती चरण में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे पांच बड़े बाजारों को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। जरूरत बढ़ने पर दूसरे शहरों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

सरकार मंडियों में प्याज की आवक और कीमतों की लगातार निगरानी करेगी। किसी इलाके में मांग बढ़ती है या कीमतों में असामान्य तेजी आती है, तो वहां अतिरिक्त प्याज भेजने का फैसला किया जा सकता है।

आम ग्राहक को क्या फायदा होगा?

सरकार की पूरी रणनीति का सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ना है। अगर बाजार में पर्याप्त प्याज उपलब्ध रहता है, तो अचानक कीमत बढ़ने की गुंजाइश कम होगी। बफर स्टॉक और रेलवे के जरिए अतिरिक्त सप्लाई इसी उद्देश्य से की जा रही है।

खास तौर पर बड़े शहरों में लक्षित खुदरा बिक्री के जरिए उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश होगी। सरकार का कहना है कि कीमत स्थिरीकरण की नीति में किसानों और ग्राहकों, दोनों के हितों का संतुलन रखा जा रहा है।

फिलहाल सरकार की नजर आने वाले महीनों की मांग और सप्लाई पर है। अगर कीमतों में फिर तेज उछाल आता है, तो बफर स्टॉक से अतिरिक्त निकासी और दूसरे बाजारों तक ‘कांदा एक्सप्रेस’ की पहुंच बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।