CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी: विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी: विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में

देश की विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए गए हैं और अगले कुछ दिनों में संसद के दोनों सदनों में नोटिस देने की योजना है. विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है तथा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों में भी अनियमितताएं हुई हैं.

विपक्ष CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव इसी सप्ताह दोनों सदनों के महासचिव को देगा. विपक्ष चाहता है कि किसी एक सदन के बजाय दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव दिया जाए. सोमवार को विपक्षी दलों की बैठक में सभी दलों की सहमति मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया. महाभियोग प्रस्ताव के लिए संसद के दोनों सदनों के विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है.

सांसदों ने हस्ताक्षर

सूत्रों के मुताबिक लोकसभा में पेश किए जाने वाले नोटिस पर लगभग 120 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जबकि राज्यसभा के लिए तैयार नोटिस पर करीब 60 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं. महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए लोकसभा के कम से कम 100 और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. बताया जा रहा है कि आवश्यक हस्ताक्षर लगभग जुटा लिए गए हैं .

अनुच्छेद 324 के तहत हटाने की मांग

यह कदम तब सामने आया है जब कई विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की गई है. अनुच्छेद 324 भारत के चुनाव आयोग की शक्तियों और उसके कामकाज को नियंत्रित करता है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पहल में प्रमुख भूमिका निभाई है. टीएमसी के वरिष्ठ सांसद दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों से संपर्क कर हस्ताक्षर जुटाने में सक्रिय रहे हैं.

TMC नेता ने कहा कहा

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत राय ने कहा कि पार्टी संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को जांच सूची में डाल दिया गया है. उनके मुताबिक लगभग 59 लाख मतदाताओं को एडजडिकेशन लिस्ट में रखा गया है जो काफी बड़ी संख्या है.

 

कांग्रेस का प्रस्ताव को समर्थन

कांग्रेस पार्टी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाती रही है और तृणमूल कांग्रेस की पहल का स्वागत करती है. कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी बिहार और पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे अभियान कई बार राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं.

सपा का भी समर्थन

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग का समर्थन किया. उनका कहना है कि मौजूदा समय में ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है. समाजवादी पार्टी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़ी है.

 

पहली बार CEC को हटाने का प्रस्ताव

यदि विपक्षी दल औपचारिक रूप से नोटिस दाखिल करते हैं, तो यह मामला संसद में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है. ये पहली बार होगा की किसी CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव लाया जाएगा.

CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को हटाने जैसी ही है, और केवल ‘साबित दुराचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर ही यह संभव है। CEC को हटाने का प्रस्ताव किसी भी सदन में लाया जा सकता है और इसे पास होने के लिए सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मौजूद व मतदान करने वालों का दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है.