शिक्षा मंत्रालय के ताजा सर्वे ने स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के स्तर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण (PARAKH Rashtriya Sarvekshan) 2024, जिसे पहले राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) के नाम से जाना जाता था, में सामने आया है कि कक्षा 3 के सिर्फ 55 फीसदी बच्चे 99 तक की संख्याओं को बढ़ते या घटते क्रम में लिख पाते हैं। वहीं, कक्षा 6 के केवल 53 फीसदी बच्चे 10 तक का पहाड़ा जानते हैं। यह सर्वे पिछले साल 4 दिसंबर को हुआ था, जिसमें देशभर के लाखों बच्चों ने हिस्सा लिया।
781 जिलों में हुआ बड़ा सर्वे
इस सर्वे में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों के 74,229 स्कूलों से 21 लाख से ज्यादा बच्चों को शामिल किया गया। इसमें कक्षा 3, 6 और 9 के सरकारी और निजी स्कूलों के 1,15,022 बच्चों का मूल्यांकन हुआ। साथ ही, 2,70,424 शिक्षकों और स्कूल लीडर्स ने प्रश्नावली के जरिए अपनी राय दी। यह सर्वे शिक्षा व्यवस्था की सेहत जांचने का एक बड़ा प्रयास है, जो बच्चों की सीखने की क्षमता को परखता है।
कक्षा 3 में गणित का हाल
सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि कक्षा 3 के सिर्फ 55 फीसदी बच्चे ही 99 तक की संख्याओं को सही क्रम (आरोही या अवरोही) में लिख पाते हैं। वहीं, 58 फीसदी बच्चे दो अंकों की संख्याओं का जोड़ और घटाव कर पाते हैं। यानी, छोटी कक्षाओं में भी बच्चों को बुनियादी गणित में दिक्कत हो रही है, जो चिंता की बात है।
कक्षा 6 में पहाड़े और गणित में कमजोरी
कक्षा 6 के बच्चों की हालत भी कुछ खास नहीं है। सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 53 फीसदी बच्चे ही 10 तक का पहाड़ा जानते हैं और अंकगणित के बुनियादी नियमों को समझ पाते हैं। साथ ही, ये बच्चे रोजमर्रा की जिंदगी में पूर्ण संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे ऑपरेशन्स का इस्तेमाल करने में भी पीछे हैं। यह दिखाता है कि गणित में बच्चों की नींव कमजोर है, जिसे मजबूत करने की जरूरत है।
गणित में सबसे कम अंक
कक्षा 6 में बच्चों को भाषा, गणित और ‘हमारे आस-पास की दुनिया’ (पर्यावरण और समाज से जुड़ा विषय Bodeaविषय) जैसे विषय पढ़ाए गए। राष्ट्रीय औसत के मुताबिक, बच्चों ने गणित में 46 फीसदी, भाषा में 57 फीसदी और ‘हमारे आस-पास की दुनिया’ में 49 फीसदी अंक हासिल किए। गणित में सबसे कम स्क Experiencesोर चिंताजनक है, क्योंकि यह बच्चों की बुनियादी समझ को दर्शाता है।
ग्रामीण बनाम शहरी बच्चों का प्रदर्शन
सर्वे में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों के प्रदर्शन में भी अंतर दिखा। कक्षा 3 में ग्रामीण बच्चे गणित और भाषा में शहरी बच्चों से बेहतर रहे। लेकिन कक्षा 6 और 9 में शहरी बच्चे सभी विषयों में ग्रामीण बच्चों से आगे निकले। यह अंतर शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों में असमानता को दर्शाता है।
निजी और सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन
कक्षा 9 में केंद्र सरकार के स्कूलों (जैसे केंद्रीय विद्यालय) ने सभी विषयों, खासकर भाषा में, शानदार प्रदर्शन किया। निजी स्कूलों ने विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में अच्छा स्कोर किया, लेकिन गणित में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा। सरकारी और सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों में भी गणित में कम अंक देखे गए। यह दिखाता है कि गणित की पढ़ाई पर पूरे देश में ध्यान देने की जरूरत है।
शिक्षा सचिव ने क्या कहा?
स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि यह सर्वे सिर्फ आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाना है। इसके लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर वर्कशॉप होंगे, जहां डेटा के आधार पर जिला-स्तर की रणनीति बनाई जाएगी। यह कदम शिक्षा में सुधार के लिए अहम साबित हो सकता है।
आगे क्या?
यह सर्वे शिक्षा नीति निर्माताओं और शिक्षकों के लिए एक आइना है। गणित और बुनियादी कौशलों में कमजोरी को दूर करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण, बेहतर शिक्षण विधियों और संसाधनों पर ध्यान देना होगा। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने की जरूरत है। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 की रिपोर्ट शिक्षा सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो नीति निर्माताओं को सही दिशा दिखा सकती है।



