PM मोदी का 4 महीने में चौथा बिहार दौरा, 3 दर्जन सीटों पर होगी नजर, वहां किसकी मजबूत पकड़

PM मोदी का 4 महीने में चौथा बिहार दौरा, 3 दर्जन सीटों पर होगी नजर, वहां किसकी मजबूत पकड़

पटना: बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों की सरगर्मी तेज हो चुकी है। कई बड़े नेता बिहार में अपनी रैलियों से माहौल गर्माने में जुटे हैं। इस कड़ी में पीएम मोदी अपने 53वें बिहार दौरे के लिए पूर्वी चंपारण के मोतिहारी को चुना है। यह इलाका सियासी तौर पर बेहद अहम है, और बीजेपी की नजर यहां की 12 विधानसभा सीटों के साथ-साथ आसपास के जिलों की करीब तीन दर्जन सीटों पर है। इस रैली के जरिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपनी ताकत को और मजबूत करने की कोशिश में है। आइए, जानते हैं कि पीएम का यह दौरा क्यों है खास और इसका सियासी मकसद क्या है।

मोतिहारी क्यों है खास?

पूर्वी चंपारण का मोतिहारी, जो नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, बिहार की सियासत में बड़ा रोल अदा करता है। इस जिले में 12 विधानसभा सीटें हैं, और यह इलाका बीजेपी और एनडीए का गढ़ माना जाता है। इसके आसपास सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर और गोपालगंज जैसे जिले हैं, जिनमें कुल मिलाकर करीब 36 विधानसभा सीटें आती हैं। पीएम मोदी की 18 जुलाई को होने वाली रैली का मकसद इन सभी सीटों पर एनडीए के पक्ष में माहौल बनाना है। बीजेपी ने इस रैली की तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जा चुका है, और स्थानीय नेताओं के साथ-साथ बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी तैयारियों का जायजा ले चुके हैं।

2020 में एनडीए का दमदार प्रदर्शन

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने पूर्वी चंपारण में शानदार प्रदर्शन किया था। यहां की 12 सीटों में से 9 पर एनडीए को जीत मिली, जिसमें बीजेपी ने 8 और जेडीयू ने 1 सीट जीती। बाकी 3 सीटें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के खाते में गईं। सीतामढ़ी की 8 सीटों में से 6 पर एनडीए का कब्जा रहा, जिसमें बीजेपी को 4 और जेडीयू को 2 सीटें मिलीं। शिवहर की एकमात्र सीट भी एनडीए के पास थी। गोपालगंज में 6 में से 4 सीटें एनडीए ने जीतीं, जबकि मुजफ्फरपुर में 11 में से 6 सीटों पर एनडीए ने कब्जा जमाया। हालांकि, मुजफ्फरपुर में RJD ने 5 सीटें जीतकर कड़ी टक्कर दी थी। इस मजबूत प्रदर्शन को एनडीए 2025 में और बेहतर करना चाहता है।

मुजफ्फरपुर में कांटे की टक्कर

मुजफ्फरपुर जिला एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए चुनौती भरा रहा है। 2020 में यहां की 11 सीटों में से 6 पर एनडीए को जीत मिली, जिसमें बीजेपी को 5, जेडीयू को 1 और वीआईपी को 1 सीट मिली। लेकिन RJD ने 5 और कांग्रेस ने 1 सीट जीतकर कड़ा मुकाबला किया। बोचहां सीट पर वीआईपी के मुसाफिर पासवान की जीत के बाद उनके निधन के कारण हुए उपचुनाव में उनके बेटे RJD के टिकट पर जीते। इसी तरह कुर्हानी सीट पर उपचुनाव में बीजेपी ने बाजी मारी। इस जिले में सभी दलों की मजबूत पकड़ है, और पीएम की रैली से एनडीए इसे और मजबूत करना चाहता है।

चंपारण: बीजेपी का मजबूत गढ़

पूर्वी और पश्चिमी चंपारण मिलाकर 21 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें 2020 में एनडीए ने 17 सीटें जीती थीं। इनमें से 15 सीटें अकेले बीजेपी के खाते में गईं। यह इलाका बीजेपी का परंपरागत गढ़ रहा है, और पीएम मोदी की रैली से इस ताकत को और पुख्ता करने की कोशिश है। पीएम का यह 53वां बिहार दौरा है, और पिछले 10 महीनों में उनका सातवां दौरा है। अप्रैल में मधुबनी, मई में पटना और जून में सीवान के बाद अब जुलाई में मोतिहारी में उनकी रैली हो रही है। यह लगातार चौथा महीना है जब पीएम बिहार में रैली कर रहे हैं, जिससे उनकी सियासी रणनीति साफ झलकती है।

सियासी रणनीति और सौगातें

पीएम मोदी की रैली सिर्फ एक जनसभा नहीं है, बल्कि यह बिहार में एनडीए की सियासी जमीन को मजबूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। 2020 में एनडीए को मामूली बहुमत मिला था, और महागठबंधन ने कड़ी टक्कर दी थी। ऐसे में बीजेपी पीएम की लोकप्रियता को भुनाकर सत्ता विरोधी लहर को कम करना चाहती है। इस रैली में पीएम कई विकास परियोजनाओं की सौगात भी दे सकते हैं, जैसा कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने संकेत दिया है। इससे पहले भी पीएम ने चंपारण में कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया है, जैसे रेल लाइनों का दोहरीकरण और हाईवे प्रोजेक्ट्स। इस बार भी कुछ बड़े ऐलान की उम्मीद है।

2025 चुनाव में एनडीए का लक्ष्य

एनडीए ने 2025 के विधानसभा चुनाव में 225 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। मोतिहारी की रैली इस लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है। बीजेपी और जेडीयू मिलकर न सिर्फ अपनी पुरानी सीटें बचाना चाहते हैं, बल्कि महागठबंधन से कुछ और सीटें छीनने की कोशिश में हैं। खासकर मुजफ्फरपुर जैसे जिले, जहां दोनों गठबंधनों के बीच कांटे की टक्कर है, वहां पीएम की रैली माहौल बदल सकती है। बीजेपी कार्यकर्ता और स्थानीय नेता इस रैली को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं, और प्रचार गाड़ियों से लेकर सोशल मीडिया तक माहौल बनाया जा रहा है