भारत और नामीबिया के बीच सालों पुराना दोस्ताना रिश्ता नई ऊंचाइयों को छूने को तैयार है। 1946 से ही भारत ने नामीबिया की आजादी का समर्थन किया था और आज दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, और खनिज जैसे क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नामीबिया यात्रा ने इस रिश्ते को और मजबूती दी है। यह 27 साल बाद किसी भारतीय पीएम की नामीबिया यात्रा है।
नामीबिया की आजादी में भारत का साथ
भारत ने 1946 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में नामीबिया की आजादी का मुद्दा उठाकर उसका समर्थन शुरू किया था। जब नामीबिया रंगभेदी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब भारत ने दक्षिण पश्चिम अफ्रीका पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (SWAPO) का खुलकर साथ दिया। 1986 में SWAPO का पहला दूतावास नई दिल्ली में खोला गया। भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के जरिए नामीबिया को राजनयिक समर्थन देने के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण और सामग्री भी दी। मार्च 1990 में जब नामीबिया को आजादी मिली, तो भारत ने अपने पर्यवेक्षक मिशन को वहां उच्चायोग में बदल दिया। इसके बाद 1994 में नामीबिया ने नई दिल्ली में अपना पूर्ण मिशन शुरू किया। SWAPO के नेता और नामीबिया के पहले राष्ट्रपति सैम नुजोमा ने भारत का 11 बार दौरा किया, जो इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।
27 साल बाद PM मोदी की ऐतिहासिक यात्रा
नामीबिया की यात्रा करने वाले आखिरी भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे, जिन्होंने 1998 में विंडहोक का दौरा किया था। अब 27 साल बाद, पीएम नरेंद्र मोदी ने इस रिश्ते को नया आयाम दिया है। इससे पहले 2016 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामीबिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत को नामीबिया के मुक्ति संग्राम में उसके साथ खड़े होने पर गर्व है। पीएम मोदी की इस यात्रा का मकसद ऊर्जा, खनिज, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है। यह दौरा भारत-अफ्रीका फोरम समिट और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
व्यापार और निवेश में बढ़ती नजदीकी
नामीबिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है और लिथियम, जिंक, और अन्य दुर्लभ धातुओं का भी बड़ा स्रोत है। भारत और नामीबिया के बीच व्यापार हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। अप्रैल-नवंबर 2023 तक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 654 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात 418 मिलियन डॉलर और नामीबिया से आयात 235 मिलियन डॉलर रहा। मुख्य व्यापारिक वस्तुओं में खनिज तेल, दवाइयां, मशीनरी, और अनाज शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नामीबिया में भारत का निवेश करीब 800 मिलियन डॉलर है, जो ज्यादातर खनिज संसाधनों जैसे जिंक और डायमंड प्रोसेसिंग में है। भारत ने 12 मिलियन डॉलर के अनुदान से नामीबिया यूनिवर्सिटी में इंडिया विंग भी बनवाया है।
चीता डिप्लोमेसी से नया रिश्ता
2022 में भारत और नामीबिया के बीच चीता संरक्षण को लेकर एक खास समझौता हुआ। इसके तहत आठ चीतों को नामीबिया से भारत लाया गया, जो दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़ा मांसाहारी पशु स्थानांतरण था। यह कदम भारत की चीता डिप्लोमेसी का हिस्सा है, जिसने दोनों देशों के बीच पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण में सहयोग को बढ़ाया है। यह साझेदारी न सिर्फ पर्यावरण के लिए बल्कि दोनों देशों की दोस्ती के लिए भी अहम है।
संकट में भारत का साथ
भारत ने हमेशा नामीबिया के मुश्किल वक्त में उसका साथ दिया है। 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने नामीबिया को कोविशील्ड वैक्सीन की 30,000 खुराकें दीं। इसके अलावा 2017 और 2019 में जब नामीबिया सूखे से जूझ रहा था, तब भारत ने चावल और दूसरी मदद भेजी। बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के संकट के समय में नामीबिया की मदद की है। नामीबिया ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन किया है।
भारत-अफ्रीका संबंधों का हिस्सा
भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) ने दोनों को एक मंच पर लाकर उनकी एकजुटता को मजबूत किया। भारत ने अफ्रीकी देशों के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और आज भी वह अफ्रीका के साथ विकास, व्यापार, और सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने अफ्रीका के 43 देशों में 206 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी की हैं और 65 अन्य पर काम चल रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1996 से भारत ने अफ्रीका में 76 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जो 2030 तक 150 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।



