“महिलाएं सब समझती हैं”: प्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला, बोलीं—आरक्षण को शर्तों में उलझाकर क्यों रोका?

“महिलाएं सब समझती हैं”: प्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला, बोलीं—आरक्षण को शर्तों में उलझाकर क्यों रोका?

महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की राजनीति लगातार गर्म बनी हुई है। इसी बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश की महिलाएं अब किसी भी तरह के भ्रम में नहीं आने वालीं और सरकार को उन्हें गुमराह करने की कोशिश बंद करनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब महिला आरक्षण को लेकर संसद और सियासत दोनों में बहस तेज है।

नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को सरकार के लिए “काला दिन” करार दिया और कहा कि अब केवल प्रचार और छवि निर्माण से वास्तविक समस्याओं को छुपाया नहीं जा सकता।

“महिलाएं मूर्ख नहीं”—सरकार को सीधा संदेश

प्रियंका गांधी ने स्पष्ट कहा कि महिलाएं देश की स्थिति को समझ रही हैं और उन्हें किसी तरह के राजनीतिक प्रचार से भ्रमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मीडिया और पीआर के सहारे लंबे समय तक वास्तविकता छिपाना संभव नहीं है।

उनका कहना था कि अगर सरकार महिलाओं के लिए वास्तव में गंभीर है, तो उसे ठोस कदम उठाने चाहिए, न कि मुद्दों को उलझाने की कोशिश करनी चाहिए।

2023 के कानून का जिक्र, लागू करने की मांग

प्रियंका गांधी ने 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण कानून का हवाला देते हुए कहा कि जब उस समय सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था, तो अब इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इसे जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़कर क्यों रोका जा रहा है। उनके अनुसार, यह शर्तें जोड़कर असल मकसद को टालने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष की रणनीति: पीएम को पत्र और देशभर में अभियान

इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी अपनी रणनीति तय कर ली है। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पुराने महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की मांग की जाएगी।

साथ ही, INDIA गठबंधन की पार्टियां देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए यह संदेश देने की तैयारी में हैं कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे राजनीतिक एजेंडे के साथ जोड़ने का विरोध करते हैं।

जमीनी मुद्दों पर फोकस की मांग

प्रियंका गांधी ने अपने बयान में महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर महिलाएं कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों के समाधान के बजाय प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने सरकार को झटका दिया है और यह जनता, खासकर महिलाओं की नाराजगी का परिणाम है।

यह पूरा विवाद सिर्फ एक कानून के लागू होने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत देता है कि महिलाओं से जुड़े मुद्दे अब राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। आम नागरिक के लिए यह समझना अहम होगा कि वास्तविक सवाल महिलाओं के अधिकारों का है या उन अधिकारों को लागू करने की प्रक्रिया का।