पंजाब में आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के दो मौजूदा विधायकों हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों नेताओं ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार और पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने नशे की बढ़ती बिक्री, अपराध, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया। दोनों विधायकों ने अरविंद केजरीवाल और विभव कुमार को भी निशाने पर लिया। उनका कहना है कि चुनाव के समय पंजाब की जनता से जो वादे किए गए थे, उनमें से कई अब तक पूरे नहीं हुए हैं।
नशे और अपराध पर अपनी ही सरकार को घेरा
दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा करने वाली सरकार के कार्यकाल में भी चिट्टे की बिक्री जारी है। उनका दावा है कि नशे की होम डिलीवरी तक हो रही है।
उन्होंने 13-14 अक्टूबर को मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का जिक्र करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए। विधायकों ने कहा कि राज्य में गैंगस्टरवाद, फिरौती, चेन स्नैचिंग और हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं। पुलिस थानों और एसएसपी कार्यालयों के आसपास भी आपराधिक वारदातें हो रही हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
विधायकों ने सरकारी दफ्तरों, तहसीलों और पुलिस थानों में रिश्वतखोरी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को लेकर सरकार का रवैया एक जैसा नहीं है।
इस सिलसिले में उन्होंने पूर्व मंत्री और विधायक विजय सिंगला तथा ईडी की कार्रवाई के बाद जेल में बंद मंत्री संजीव अरोड़ा का मामला उठाया। दोनों नेताओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
किसान, कर्मचारी और शिक्षा व्यवस्था पर भी नाराजगी
दोनों विधायकों ने सरकार को किसान और कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि सभी फसलों पर एमएसपी और मक्का-मूंग की सरकारी खरीद जैसे वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने यूरिया की कमी का मुद्दा भी उठाया।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के करीब 14,191 करोड़ रुपये के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के बकाये का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि वेतन आयोग के बकाये और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का वादा भी अधूरा है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए विधायकों ने कहा कि पंजाब के करीब 2,400 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। इससे लगभग 77 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कॉलेजों में प्रोफेसरों के 1,531 और स्वास्थ्य विभाग में 1,098 पद खाली होने का भी दावा किया गया। ग्रामीण डिस्पेंसरियों की स्थिति और 16 नए मेडिकल कॉलेज बनाने के वादे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा।
दलितों और धार्मिक मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा
दोनों विधायकों ने दलित समुदाय को उपमुख्यमंत्री पद देने के चुनावी वादे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दलितों की छात्रवृत्ति और राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी सरकार ने अपेक्षा के मुताबिक काम नहीं किया।
इसके अलावा गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में न्याय मिलने के वादे पर भी सवाल उठाए गए।
दोनों विधायकों ने कहा कि पंजाब की जनता को चुनाव के दौरान दी गई गारंटियों का हिसाब मिलना चाहिए। उनकी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है।



