कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीजेपी पर लगाए गए ‘पार्टी चोरी’ के आरोप के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया है। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी जिन नेताओं और दलों का उदाहरण देकर बीजेपी पर सवाल उठा रहे हैं, उनमें से कुछ ने खुद कांग्रेस से अलग होकर अपनी राजनीतिक पार्टियां बनाई थीं। उन्होंने ममता बनर्जी और शरद पवार का नाम लेते हुए कांग्रेस से उनके अलग होने और नई पार्टियां बनाने का जिक्र किया।
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के भीतर हुए पुराने राजनीतिक विभाजनों और नेतृत्व से जुड़े विवादों का भी हवाला दिया। उनका तर्क था कि किसी पार्टी के टूटने या अलग होकर नया राजनीतिक संगठन बनने का इतिहास सिर्फ बीजेपी तक सीमित नहीं है।
ममता बनर्जी और शरद पवार का उदाहरण देकर बीजेपी ने साधा निशाना
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि शरद पवार कांग्रेस से अलग होकर बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के गठन की दिशा में गए थे। उन्होंने कहा कि पवार का कांग्रेस से अलगाव विदेशी मूल के मुद्दे से जुड़ा था।
त्रिवेदी ने ममता बनर्जी का भी उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी 1997 में कांग्रेस से अलग हुईं और इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस बनाई। बीजेपी नेता ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के उभार का असर कांग्रेस पर पड़ा।
यहां बीजेपी का मुख्य राजनीतिक तर्क यही था कि दलों का अलग होना और नए राजनीतिक संगठन बनना भारतीय राजनीति में पहले भी होता रहा है। इसलिए राहुल गांधी द्वारा बीजेपी पर लगाए गए आरोपों को जवाब देते हुए पार्टी ने कांग्रेस के पुराने घटनाक्रम सामने रखे।
राहुल गांधी पर तंज, कांग्रेस के इतिहास का भी किया जिक्र
त्रिवेदी ने अपने बयान में राहुल गांधी की राजनीतिक समझ और कांग्रेस के इतिहास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई नेता लिखे हुए भाषण पढ़ते हैं, लेकिन उनके मुताबिक राहुल गांधी इस मामले में विशेष रूप से चर्चा में रहते हैं।
इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम देखने की सलाह दी। त्रिवेदी ने 1969 में कांग्रेस के भीतर हुए विभाजन का उल्लेख किया और कहा कि उस दौर में इंदिरा गांधी की भूमिका को भी कांग्रेस के इतिहास के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व से जुड़े हालिया घटनाक्रम का भी जिक्र किया। त्रिवेदी ने दावा किया कि कुछ समय पहले अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की संभावना पर चर्चा थी, लेकिन वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
इन बयानों के जरिए बीजेपी नेता ने राहुल गांधी के आरोप का जवाब कांग्रेस के अपने इतिहास के संदर्भ से देने की कोशिश की।
चौधरी चरण सिंह से राजस्थान तक, बीजेपी नेता ने गिनाए कई राजनीतिक उदाहरण
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चौधरी चरण सिंह का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उन्हें राजनीतिक रूप से समर्थन देने के बाद समर्थन वापस लिया था।
उन्होंने राजस्थान की राजनीति से जुड़े 2009 और 2018 के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया और कांग्रेस पर दूसरे राजनीतिक दलों के साथ राजनीतिक समीकरणों को लेकर आरोप लगाए।
हालांकि, इन सभी घटनाक्रमों की व्याख्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे और दृष्टिकोण रहे हैं। इसलिए इन्हें संबंधित नेताओं के राजनीतिक बयानों और आरोपों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
‘पार्टी चोरी’ के बयान ने बढ़ाई सियासी बहस
राहुल गांधी का ‘पार्टी चोरी’ वाला आरोप और उसके बाद बीजेपी का जवाब अब राजनीतिक बहस का नया हिस्सा बन गया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही एक-दूसरे के राजनीतिक इतिहास और संगठनात्मक फैसलों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यह है कि दोनों दल अपनी-अपनी बात साबित करने के लिए पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का सहारा ले रहे हैं। बीजेपी राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में कांग्रेस से अलग हुए नेताओं और पुराने पार्टी विभाजनों का उदाहरण दे रही है।
दूसरी तरफ, राहुल गांधी का मूल आरोप बीजेपी की राजनीति और दूसरे दलों से जुड़े उनके राजनीतिक दावों पर केंद्रित है।
ऐसे में यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक इतिहास, दल-बदल और पार्टियों के संगठनात्मक स्वरूप को लेकर बहस और तेज हो सकती है।


