राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा संभव! SIT की फाइनल रिपोर्ट में कई नए नामों पर नजर, आखिर क्यों हो रही देरी?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा संभव! SIT की फाइनल रिपोर्ट में कई नए नामों पर नजर, आखिर क्यों हो रही देरी?

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है और माना जा रहा है कि इसे जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दिया जाएगा। शुरुआती जांच जहां कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी तक सीमित थी, वहीं अब जांच का दायरा मंदिर में दान के संग्रह, नकदी की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। ऐसे में फाइनल रिपोर्ट से कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

फाइनल रिपोर्ट में देरी क्यों, क्या हो रही है आखिरी समीक्षा?

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। हालांकि रिपोर्ट सौंपने से पहले जांच टीम हर निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्य की दोबारा समीक्षा कर रही है। इसी वजह से अंतिम रिपोर्ट पेश करने में कुछ समय लग रहा है।

जांच के दौरान टीम ने वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षा व्यवस्था, बैंकिंग प्रक्रिया और संबंधित लोगों के बयान का विस्तृत परीक्षण किया है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में केवल गिरफ्तार संविदा कर्मचारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि पूरे चढ़ावा प्रबंधन तंत्र की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था का भी विस्तृत विश्लेषण शामिल है।

जांच का दायरा बढ़ा, केवल चोरी नहीं पूरी व्यवस्था की हुई पड़ताल

शुरुआत में मामला कथित चढ़ावा चोरी तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ SIT ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। इसमें यह देखा गया कि मंदिर में प्राप्त दान की गिनती कैसे होती है, उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया क्या है और बैंक में जमा करने तक कौन-कौन जिम्मेदार रहता है।

पिछले महीने 23 जून को SIT ने सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। उस रिपोर्ट में कथित तौर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से तय सुरक्षा मानकों के बार-बार उल्लंघन का उल्लेख किया गया था। अब अंतिम रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर और स्पष्ट निष्कर्ष आने की संभावना जताई जा रही है।

क्या जिम्मेदारी तय होगी? रिपोर्ट पर टिकी हैं निगाहें

प्रारंभिक रिपोर्ट में छह संविदा नकदी गिनने वाले कर्मचारियों और दो पर्यवेक्षी कर्मियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता का उल्लेख किया गया था। हालांकि उस समय वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई थी।

अब माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी स्पष्ट टिप्पणी की जा सकती है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल लापरवाही या अनुपस्थिति को जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं माना जा सकता।

कुछ नए नामों का भी जिक्र, लेकिन अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

जांच के दौरान कई स्तरों पर कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख होने की संभावना है कि कुछ ऐसे लोगों की भूमिका की भी समीक्षा की गई है, जिनके बारे में जांच के दौरान विभिन्न तथ्य सामने आए।

खबरों के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव का नाम भी जांच के दौरान सामने आया है। रिपोर्ट में कथित तौर पर इनके संबंधों और मामले से जुड़े कुछ पहलुओं का उल्लेख हो सकता है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष और जिम्मेदारी तय करने का फैसला SIT की आधिकारिक रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद पुलिस जांच का दायरा और आगे बढ़ सकता है तथा रिपोर्ट में जिन पहलुओं का उल्लेख होगा, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।