राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़: 6 साल की चुप्पी पर सवाल, 4 दिन में 14 इंटरव्यू से क्यों नाराज हुए चंपत राय?

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़: 6 साल की चुप्पी पर सवाल, 4 दिन में 14 इंटरव्यू से क्यों नाराज हुए चंपत राय?

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और कथित चोरी के विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के लिखित बयान में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, मीडिया में दिए गए बयानों और कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मीडिया इंटरव्यू पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि छह साल तक व्यवस्थाओं को लेकर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में लगातार कई इंटरव्यू सामने आने से गलत संदेश गया।

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि राम मंदिर से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे श्रद्धालुओं की भावनाओं और मंदिर की व्यवस्था पर असर डालता है। अब संत समाज भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है।

6 साल तक चर्चा नहीं, फिर 4 दिन में 14 इंटरव्यू पर सवाल

चंपत राय के मुताबिक, 6 जुलाई को नृपेंद्र मिश्रा की ट्रस्ट की बैठक में शामिल होने की योजना थी। उनके लिए टिकट भी हो चुका था, लेकिन 4 जुलाई को अचानक कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। इसके बाद मीडिया में उनके लगातार बयान सामने आए।

चंपत राय ने सवाल उठाया कि करीब छह साल के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर किसी से चर्चा नहीं की, लेकिन महज चार दिनों में करीब 14 चैनलों को इंटरव्यू देना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि इस तरह की स्थिति से जनता और संत समाज के बीच गलत संदेश गया।

चंपत राय ने यह भी दावा किया कि कुछ संतों ने नृपेंद्र मिश्रा को इस पूरे विवाद में खलनायक के तौर पर देखा है। हालांकि, ये बातें चंपत राय के पक्ष से सामने आई हैं और इनके अलग-अलग पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं है।

SIT की पूछताछ से लेकर FIR पर उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच कर रही SIT ने 15 जुलाई को चंपत राय से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की थी। इसके बाद यह दावा सामने आया कि चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद शुरुआती स्तर पर FIR दर्ज कराने को लेकर चंपत राय की भूमिका पर सवाल उठे थे।

यहीं से एक बड़ा सवाल सामने आया कि आखिर पुलिस कार्रवाई को लेकर उस समय क्या सोच थी? चंपत राय ने अपने लिखित विवरण में पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से रखा है। उन्होंने मामले के पीछे की परिस्थितियों और ट्रस्ट के भीतर की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं।

उनके मुताबिक, इस विवाद का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों पर इसके प्रभाव की आशंका जताई और यह शक भी जाहिर किया कि ट्रस्ट से जुड़ी अंदरूनी जानकारी किसी व्यक्ति के जरिए बाहर पहुंची और फिर राजनीतिक स्तर तक गई।

11 जून की बैठक और ‘अंदर की बात’ बाहर आने का शक

चंपत राय के लिखित विवरण के अनुसार, 11 जून को लखनऊ में भैयाजी जोशी ने एक बैठक बुलाई थी। इसमें ट्रस्ट से जुड़े पांच लोग और एक प्रांत प्रचारक मौजूद थे। चंपत राय का कहना है कि वह नहीं चाहते थे कि बैठक की बातें मीडिया या किसी बाहरी व्यक्ति तक पहुंचें।

उनके अनुसार, बाद में राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ दुष्प्रचार किए जाने की स्थिति बनी। उन्होंने इसे कथित तौर पर प्रायोजित अभियान से भी जोड़ा। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।

इसी विवाद के दौरान एक आरोपी के नेपाल भागने की बात भी सामने आई। बताया गया कि उसे भारत-नेपाल सीमा के पास पकड़ लिया गया। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने अब सिर्फ चढ़ावे की कथित चोरी का मामला नहीं, बल्कि इससे जुड़े पूरे नेटवर्क और घटनाक्रम की कड़ियों को समझने की चुनौती भी है।

संत समाज की बैठक से बढ़ी हलचल, जांच की मांग तेज

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब संत समाज के बीच भी बड़ा मुद्दा बन गया है। अयोध्या में आज सुबह 11 बजे संत समाज की बैठक प्रस्तावित है। इसमें कंप्यूटर बाबा समेत कई साधु-संतों के शामिल होने की बात कही गई है।

संतों की ओर से ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। साथ ही कथित चढ़ावा घोटाले की उच्चस्तरीय जांच और CBI जांच की मांग भी उठाई गई है।

संत समाज ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी है। इसके अलावा चंपत राय के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग भी की गई है। संतों का आरोप है कि SIT ने छोटे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि बड़े लोगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की बात कही गई है। संत रामलला के दर्शन कर इस पूरे विवाद को लेकर भगवान राम से क्षमा मांगने की बात भी कह रहे हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और सामने आ रहे आरोपों के बीच कई सवाल बाकी हैं। चढ़ावे की कथित चोरी में वास्तव में कौन-कौन शामिल था, ट्रस्ट के भीतर की जानकारी बाहर कैसे पहुंची और आरोपों में कितनी सच्चाई है—इन सवालों का जवाब जांच की आगे की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।