राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर योगी सरकार का बड़ा कदम, SIT गठित; 15 दिन में आएगी फाइनल रिपोर्ट

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर योगी सरकार का बड़ा कदम, SIT गठित; 15 दिन में आएगी फाइनल रिपोर्ट

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने अब प्रशासनिक स्तर पर बड़ा मोड़ ले लिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित यह टीम पूरे मामले की जांच करेगी और 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

दिलचस्प बात यह है कि जांच की मांग खुद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से की गई थी। ट्रस्ट का मानना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से मामले की सच्चाई सामने आएगी और मंदिर में दान व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा।

ट्रस्ट की मांग पर बनी SIT, वरिष्ठ अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

सरकार की ओर से गठित एसआईटी की कमान लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है। टीम में रेंज आईजी किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को भी शामिल किया गया है।

SIT के सदस्य:

  • विजय विश्वास पंत (IAS) – मंडलायुक्त, लखनऊ (अध्यक्ष)
  • किरन एस (IPS) – आईजी रेंज
  • नील रतन – विशेष सचिव, वित्त विभाग

सरकार ने जांच को समयबद्ध रखने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं। टीम को 7 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

आखिर कैसे शुरू हुआ चढ़ावा विवाद?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंदिर की दान पेटियों से निकाली गई राशि के मिलान के दौरान कथित तौर पर कुछ रकम कम पाए जाने की चर्चा सामने आई। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की।

सूत्रों के मुताबिक कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई और कुछ स्तरों पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं। हालांकि अब तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और राजनीतिक तथा धार्मिक दोनों स्तरों पर सवाल उठने लगे।

जांच में क्या-क्या खंगालेगी SIT?

जांच टीम मंदिर में प्राप्त दान राशि, उसकी गिनती, रिकॉर्ड, बैंक जमा प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा करेगी। जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।

प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। शासन चाहता है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।

आस्था और पारदर्शिता दोनों पर टिकी नजर

राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे को लेकर उठे आरोपों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचा है। संत समाज, विभिन्न संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी मामले की पारदर्शी जांच की मांग की थी।

अब SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित अनियमितताओं के आरोपों में कितनी सच्चाई है। आने वाले 15 दिन इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।