राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सपा का बड़ा हमला, बोली- ‘SIT के अफसर ही सवालों के घेरे में, जांच सुप्रीम कोर्ट कराए’

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सपा का बड़ा हमला, बोली- ‘SIT के अफसर ही सवालों के घेरे में, जांच सुप्रीम कोर्ट कराए’

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस बीच समाजवादी पार्टी ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सपा नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने साफ कहा है कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी जांच का कोई कानूनी और व्यावहारिक आधार नहीं बनता।

राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने अब केवल प्रशासनिक या धार्मिक दायरे तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। सपा का आरोप है कि जिन अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनकी निष्पक्षता पर ही सवाल उठ रहे हैं।

SIT की जांच पर सपा ने क्यों उठाए सवाल?

पवन पांडेय ने प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार ने जिस एसआईटी का गठन किया है, उसके कुछ सदस्यों को लेकर पहले से ही विभिन्न स्तरों पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक जांच प्रक्रिया अधूरी और संदिग्ध मानी जाएगी। सपा नेता के मुताबिक, अगर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे हैं तो सबसे पहले आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।

उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल कर्मचारियों से पूछताछ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे प्रबंधन तंत्र की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से जांच कराने की मांग

सपा नेता ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद हुआ था। ऐसे में यदि ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लग रहे हैं तो इस मामले की निगरानी भी सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर होनी चाहिए।

पवन पांडेय ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराए। उनका कहना है कि इससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी साबित होती है तो यह केवल श्रद्धालुओं की आस्था के साथ नहीं, बल्कि न्यायपालिका के भरोसे के साथ भी विश्वासघात माना जाएगा।

क्या कर रही है SIT?

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इस टीम की अगुवाई लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। टीम में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन भी शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम मंदिर में प्राप्त दान राशि, आभूषणों और उनके लेखा-जोखा से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है। कई कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ भी की जा चुकी है।

बताया जा रहा है कि एसआईटी ने उन कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी भी मांगी है, जो दान पेटियों से प्राप्त नकदी और आभूषणों की गिनती या प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उनके और उनके परिजनों की संपत्तियों की भी जांच की जा सकती है।

ट्रस्ट भंग करने तक की उठी मांग

सपा नेता ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह मांग भी की कि जांच पूरी होने तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए या उसके वर्तमान पदाधिकारियों की भूमिका सीमित की जाए।

उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में अयोध्या के संत-महंतों और प्रमुख धार्मिक प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी अधिक खुला और पारदर्शी बनाने की जरूरत बताई।

फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और सरकार ने प्रारंभिक तथा अंतिम रिपोर्ट के लिए समयसीमा भी तय कर रखी है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।