RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग: क्या अक्टूबर में सस्ता होगा लोन?

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग: क्या अक्टूबर में सस्ता होगा लोन?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग शुरू हो चुकी है. इस मीटिंग में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि एक अक्टूबर को ब्याज दरों में कटौती की जाए या नहीं. महंगाई के आंकड़ों का अनुमान कितना दिया जाए. ग्रोथ कितनी रह सकती है? इसका भी अनुमान लगाया जाएगा. वैसे रॉयटर्स पोल में पहले ही इस बात की संभावना जताई जा चुकी है कि आरबीआई ब्याज दरों को होल्ड कर सकता है. वहीं दूसरी ओर एसबीआई समेत सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकोनॉमिक्स ने संभावना जताई है कि इस बार तमाम रुकावटों के बावजूद आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.

इसका मतलब है कि आरबीआई ने आम लोगों को ब्याज दरों में कटौती कर फिर से सरप्राइज कर सकता है. जून के महीने में आरबीआई ने पॉलिसी मीटिंग के बाद 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती जिस तरह से आम लोगों को मेगा बूस्टर देने का काम किया था. कुछ वैसा ही दिवाली से पहल आम लोगों को आरबीआई की ओर से बेहतरीन गिफ्ट मिल सकता है.

आरबीआई ने वर्ष की शुरुआत से अब तक दरों में पॉलिसी रेट में 1 फीसदी की कटौती की है. फरवरी और अप्रैल के महीने में आरबीआई ने 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. उसके बाद जून के महीने में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर देश को लोन ईएमआई में बड़ी राहत दी थी. अगस्त के महीने में आरबीआई ने ब्याज दरों को होल्ड कर दिया था. साथ ही मॉनेटरी पॉलिसी को न्यूट्रल कर दिया था. उसके बाद से वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं.

भारत पर अमेरिका कुल् टैरिफ 50 फीसदी पर आ गया है. साथ ही एच1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी की गई है. जिसकी वजह से रुपए ऑल टाइम लोअर लेवल पर आ गया है. ऐसे में कुछ ऐसे कारण भी है कि आरबीआई को अगस्त वाले फैसले पर भी कायम रहना पड़ सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर अलग अलग जानकारों का क्या कहना है…

सिटी बैंक का क्या है अनुमान

सिटी के अर्थशास्त्रियों ने लिखा है कि अक्टूबर की बैठक फिर से शुरू हो गई है. कहा है कि आरबीआई बाहरी झटकों से बचने के लिए “इंश्योरेंस” रेट्स में कटौती का विकल्प चुन सकता है, या जल्द ही कार्रवाई करने के स्पष्ट संकेत के साथ एक नरम रुख अपना सकता है. आरबीआई की तीन दिवसीय बैठक 1 अक्टूबर को समाप्त हो रही है. सिटी के अनुसार हमारा थोड़ा-बहुत मानना ​​है कि आरबीआई इंश्योरेंस रेट्स में कटौती का ऑप्शन को ही चुनेगा.”

जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज़्यादा 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी थी, लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह आंकड़ा इकोनॉमी की वास्तविक मज़बूती को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकता है क्योंकि इसकी कैलकुलेशन महंगाई को एडजस्ट करने के बाद हुई थी. सरकार ने इनकम टैक्स में राहत और जीएसटी रेट्स को युक्तिसंगत बनाकर राजकोषीय सहायता बढ़ा दी है, लेकिन टैरिफ और रुपए की कमजोरी ने इस संभावना को धुंधला कर दिया है. अमेरिका के साथ व्यापार तनाव, जिसमें भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ और हाई वीजा शुल्क शामिल हैं, ने कई तरह की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

कैपिटल इकोनॉमिक्स का ये है अनुमान

कैपिटल इकोनॉमिक्स ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ पर पड़ने वाला असर, और साथ ही महंगाई पर सॉफ्ट आउटलुक, आरबीआई के लिए रेट कट करने का बेस तैयार कर रहा है. साथ ही, अगले हफ़्ते दरों में कटौती और दिसंबर में एक और कटौती की भविष्यवाणी की है. महंगाई आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे रही है, और अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि जीएसटी दरों में कटौती से महंगाई में और कमी आएगी. अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि पूरे वर्ष की ग्रोथ रेट के अनुमान में वृद्धि और महंगाई में कमी की जाएगी.

एसबीआई भी जता चुका है कटौती की संभावना

एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने एक नोट में कहा है कि ब्याज दरों में कटौती आरबीआई को एक दूरदर्शी सेंट्रल बैंक के रूप में स्थापित करेगी, लेकिन जून के बाद ब्याज दरों में ढील के हाई स्टैंडर्ड को देखते हुए उन्होंने सोच-समझकर संवाद करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2027 में भी महंगाई सामान्य बनी रहेगी. फिर भी, अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया कि आरबीआई दिसंबर तक इंतजार करना पसंद कर सकता है, वो भी तब जब अमेरिका के साथ ट्रेड वार्ता पॉजिटिवली आगे बढ़े. भारत के बॉन्ड और ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप बाजारों ने बुधवार को ब्याज दरों में कटौती का अभी तक मूल्यांकन नहीं किया है, और व्यापारियों का अनुमान है कि अगर केंद्रीय बैंक मौद्रिक ढील के साथ आश्चर्यचकित करता है तो इसमें तेजी आएगी.

25 बेसिस प्वाइंट्स की हो सकती है कटौती

एसबीआई से लेकर तमाम एजेंसीज का मानना है कि आरबीआई एमपीसी ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है. जिसके बाद आरबीआई का रेपो रेट 5.25 फीसदी हो जाएगा. अगर ऐसा होता है तो मौजूदा साल में ब्याज दरों में 1.25 फीसदी की कटौती हो सकती है. वहीं कुछ ने दिसंबर के महीने में भी ब्याज दरों में इतनी कटौती का अनुमान लगाया है. ऐसे में मौजूदा साल में 1.50 फीसदी की कटौती देखी जा सकती है.