Re-NEET परीक्षा का पेपर Telegram चैनलों पर उपलब्ध कराने और छात्रों से लाखों रुपये मांगने के आरोप में जेल में बंद एक व्यक्ति को गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ऐसे में अभियोजन पक्ष आरोपी की हिरासत जारी रखने या उसे और लंबा खींचने के लिए कोई ठोस वजह नहीं बता पाया।
यह मामला Sumersing Bharatlal Meena बनाम State of Gujarat से जुड़ा है। जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को कुछ शर्तों के साथ नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह राय मामले के तथ्यों और FIR में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए बनाई, लेकिन सबूतों पर विस्तार से कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की।
Telegram पर विज्ञापन और छात्रों से लाखों रुपये मांगने का आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर कुछ सह-आरोपियों के साथ मिलकर Re-NEET परीक्षा का पेपर लीक करने की साजिश रची थी। आरोप है कि इसके लिए दो सिम कार्ड खरीदे गए और अलग-अलग Telegram चैनलों पर पेपर उपलब्ध कराने के विज्ञापन चलाए गए।
इन विज्ञापनों के जरिए छात्रों को परीक्षा में सफलता दिलाने का भरोसा देने की बात कही गई। इसके बदले अलग-अलग रकम मांगी गई थी। आरोप के अनुसार, रकम 60,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक बताई गई।
मामले में अलग-अलग विषयों के पेपर के लिए भी अलग कीमत तय किए जाने का आरोप है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर के लिए 25,000 रुपये मांगे जाने की बात सामने आई। वहीं पूरे पेपर के लिए 60,000 रुपये की मांग और मनी-बैक गारंटी का भी उल्लेख किया गया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इस तरीके से अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर छात्रों के साथ धोखाधड़ी की गई।
कोर्ट ने देखा- जांच पूरी, चार्जशीट दाखिल और आरोपी लंबे समय से जेल में
जमानत याचिका पर विचार करते समय हाईकोर्ट ने कई परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना। अदालत के सामने यह तथ्य था कि आरोपी 13 जून 2026 से जेल में है। इस दौरान मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी से अब किसी तरह की बरामदगी या आगे कोई महत्वपूर्ण जानकारी हासिल किया जाना बाकी नहीं बताया गया है।
अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ बताई गई भूमिका के अलावा कोई दूसरी भूमिका स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखी गई। कोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई JMFC यानी Judicial Magistrate First Class के समक्ष होनी है।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं बताया गया।
ट्रायल में समय लगेगा, हिरासत बढ़ाने की ठोस वजह नहीं मिली
गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते हुए यह भी ध्यान में रखा कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने और उसके पूरा होने में समय लग सकता है। ऐसे में किसी आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखने के लिए अभियोजन पक्ष को हिरासत जारी रखने का ठोस आधार बताना जरूरी है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी की हिरासत जारी रखने या उसे और लंबा खींचने के लिए कोई पर्याप्त कारण नहीं बता सका।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के सबूतों पर विस्तार से कोई टिप्पणी नहीं की है। जमानत के स्तर पर अदालत ने केवल उपलब्ध तथ्यों और FIR में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए प्रथमदृष्टया यह माना कि आरोपी को नियमित जमानत देने का मामला बनता है।
जमानत का मतलब आरोप खत्म होना नहीं
हाईकोर्ट के आदेश का मतलब यह नहीं है कि पेपर लीक या छात्रों से रकम मांगने के आरोप अदालत ने सही या गलत घोषित कर दिए हैं। मामला अभी ट्रायल के स्तर पर जाना है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम फैसला सबूतों और सुनवाई के बाद होगा।
अदालत ने फिलहाल जांच पूरी होने, चार्जशीट दाखिल होने, आरोपी की हिरासत की अवधि, किसी अन्य आपराधिक इतिहास के अभाव और ट्रायल में लगने वाले संभावित समय जैसे पहलुओं को देखते हुए जमानत दी है।
इस तरह Re-NEET पेपर लीक से जुड़े इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट का आदेश मुख्य रूप से लंबी हिरासत और जमानत के लिए जरूरी परिस्थितियों से जुड़ा है। आरोपी को अदालत द्वारा तय शर्तों के अधीन रिहा किया जाएगा।
Case Title: SUMERSING BHARATLAL MEENA Versus STATE OF GUJARAT


