Rocking Stars Yash Ke Kisse: एक लड़का, जिसके पिता बस चलाते हैं. वो चाहते हैं कि उनका बेटा बड़ा होकर सरकारी नौकरी करे. पर दूसरी तरफ बेटे ने अपने लिए कुछ और ख्वाब ही सजा रखे हैं. हीरो बनने का ख्वाब. स्कूल में जब बच्चों से पूछा जाता है कि बड़े होकर क्या बनोगे. उसके दोस्तों में से कोई डॉक्टर कहता है तो कोई इंजीनियर, पर वो लड़का कहता है हीरो. उस दिन क्लास में उसकी ये बात तो सभी को मजाक जैसी लगी होगी, लेकिन उसके लिए ये मजाक नहीं था, ये उसकी जिद थी कि बनना तो हीरो ही है. उसके घर वाले भी उसके इस फैसले का समर्थन नहीं करते हैं. वो घर से खाली हाथ निकल जाता है शहर की ओर, संघर्ष करता है और हीरो बनता भी है. और सिर्फ हीरो ही नहीं बल्कि वो कन्नड़ सिनेमा का सबसे बड़ा स्टार बनता है. कहानी थोड़ी फिल्मी लग रही है…फिल्मी लगनी भी चाहिए, क्योंकि ये कहानी है रॉकिंग स्टार यश की, जिन्हें उनके चाहने वाले रॉकी भाई कहते हैं.
जिस तरह उनकी फिल्में लार्जन देन लाइफ होती हैं, उसी तरह उनकी असल जिंदगी की कहानी भी है. आज यानी 8 जनवरी को रॉकी भाई का 40वां बर्थडे है. इस मौके पर बात करते हैं उनके रॉकिंग स्टार बनने की. उनका जन्म साल 1986 में हुआ था. जन्म स्थान- कर्नाटक के हसन जिले का एक छोटा से गांव भुवनहल्ली. पिता का नाम अरुण कुमार, जो रोडवेज बस चलाते थे. मां का नाम पुष्पा, जो गृहिणी थीं. माता-पिता ने उनका नाम रखा नवीन कुमार गौड़ा.



