महाराष्ट्र के सतारा इलाके में महिला डॉक्टर सुसाइड केस में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान आया है. उन्होंने मृतका को अपनी छोटी बहन बताते हुए समझौता करने से इनकार कर दिया है. सीएम फडणवीस ने कहा कि गुरुवार को हमारी छोटी बहन ने आत्महत्या कर ली, उसकी मौत बेहद दुखद है. उसने अपनी जान देने का कारण अपने हाथों पर लिखा था.
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वैसे पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर कार्रवाई की है. पुलिस जांच में केस से जुड़े सभी तथ्य धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. पुलिस गहनता से इस मामले की जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि जब तक हमारी छोटी बहन को इंसाफ नहीं मिल जाता है हम चुप नहीं बैठेंगे. बहन को इंसाफ दिलाने तक इस केस की गहनता से जांच जारी रहेगी, आरोपी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मूलरूप से बीड जिले की रहने वाली महिला डॉक्टर सतारा के फलटन उप-जिला अस्पताल में मेडिकल अफसर के तौर पर काम करती थी. उसने अपनी हधेली पर सुसाइड नोट लिखा है. जिसमें सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदने पर चार बार बलात्कार का आरोप लगाया है, जिसमें उसने बताया है कि पुलिस मामलों में आरोपियों के फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए उस पर दबाव डाला गया और मना करने पर उसे परेशान किया गया. वहीं, सुसाइड नोट में प्रशांत बानकर पर भी गंभीर आरोप लगाई है.
क्यों गर्माई सियासत?
सुसाइड नोट में डॉक्टर ने लिखा कि एक सांसद के दो निजी सहायकों ने अस्पताल आकर उनसे फोन पर सांसद से बात कराई थी. इस दौरान सांसद ने उन्हें परोक्ष रूप से धमकी दी थी. हालांकि, सांसद और उनके पीए का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि महिला डॉक्टर ने भाजपा के पूर्व सांसद रणजीत नाईक निंबालकर का जिक्र किया है. इस मामले में पूर्व सांसद का नाम आने के बाद राज्य में सियासत भी गर्मा गई है. शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने भाजपा के पूर्व सांसद पर कार्रवाई की मांग की है.



