जेल में Ph.D की पढ़ाई जारी रखने की मांग, शरजील इमाम की 2,132 रिसर्च फाइलों पर तिहाड़ से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

जेल में Ph.D की पढ़ाई जारी रखने की मांग, शरजील इमाम की 2,132 रिसर्च फाइलों पर तिहाड़ से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम की उस मांग पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है, जिसमें उसने जेल के अंदर बिना इंटरनेट और वाई-फाई वाले कंप्यूटर पर अपनी Ph.D से जुड़ी रिसर्च सामग्री देखने की अनुमति मांगी है। इमाम की ओर से अदालत को बताया गया कि वह जनवरी 2020 से हिरासत में है और गिरफ्तारी के समय उसकी Ph.D अंतिम वर्ष में थी। अब अदालत ने जेल प्रशासन से पूरे मामले पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

जस्टिस संजीव नरूला की अदालत ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। इमाम वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आरोपी है।

Ph.D पूरी करने के लिए जेल में रिसर्च की अनुमति क्यों मांगी?

अदालत में इमाम की ओर से पेश वकील अहमद इब्राहिम ने बताया कि उनके मुवक्किल की Ph.D का काम उस समय चल रहा था, जब उन्हें हिरासत में लिया गया था। वकील के मुताबिक, उनके शोध का सारांश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मंजूर हो चुका है।

अब उनकी कोशिश अपनी रिसर्च पूरी करने की है। इसके लिए उन्होंने जेल में मौजूद कंप्यूटर का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। शर्त यह रखी गई है कि कंप्यूटर इंटरनेट और वाई-फाई से पूरी तरह अलग हो और रिसर्च सामग्री पेन ड्राइव के जरिए उसमें उपलब्ध कराई जाए।

जेल प्रशासन की निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया को करने का प्रस्ताव अदालत के सामने रखा गया है। यानी मांग यह नहीं है कि जेल के अंदर इंटरनेट की खुली सुविधा दी जाए, बल्कि पहले से मौजूद रिसर्च सामग्री को एक ऑफलाइन कंप्यूटर पर देखने की अनुमति मिले।

2,132 फाइलों में क्या-क्या है?

सुनवाई के दौरान इमाम के वकील ने बताया कि वह कुल 2,132 फाइलों तक पहुंच चाहता है। इन फाइलों में शोध लेख, किताबें और अलग-अलग अभिलेखीय दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट शामिल हैं।

वकील ने अदालत को बताया कि इन सामग्रियों को पेन ड्राइव में रखा गया है। इसे इंटरनेट से जुड़े बिना कंप्यूटर में डाला जा सकता है। इसके बाद जेल कर्मचारियों की निगरानी में इमाम को सामग्री देखने की अनुमति दी जा सकती है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य रिसर्च सामग्री तक सीमित और नियंत्रित पहुंच देना है। अदालत के सामने फिलहाल यही सवाल है कि जेल नियमों और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं के बीच ऐसी सुविधा किस तरीके से दी जा सकती है।

दिल्ली पुलिस ने भी कहा- जेल प्रशासन से जवाब लिया जाए

इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के सामने भी इस अनुरोध का विरोध नहीं किया था। उनके मुताबिक, मौजूदा आपत्ति जेल प्रशासन की ओर से आई है।

उन्होंने अदालत से कहा कि इस स्थिति में तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब लिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर इमाम स्पष्ट रूप से यह बता दें कि उन्हें कौन-कौन सी सामग्री देखनी है, तो जेल प्रशासन की निगरानी में उस तक पहुंच देने पर विचार किया जा सकता है।

इस रुख के बाद मामले में जेल प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। अब उसे अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि प्रस्तावित तरीके से रिसर्च सामग्री उपलब्ध कराने में क्या स्थिति है और इसके लिए किन शर्तों की जरूरत होगी।

हाईकोर्ट ने मांगी स्थिति रिपोर्ट, 2 नवंबर को अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल कोई अंतिम आदेश देने के बजाय तिहाड़ जेल प्रशासन से स्थिति रिपोर्ट मांगने का निर्देश दिया। इसका मतलब है कि फिलहाल अदालत ने शरजील इमाम को 2,132 फाइलें देखने की अनुमति देने या रोक लगाने का अंतिम फैसला नहीं किया है।

मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। उस समय जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर अदालत इस अनुरोध पर आगे विचार करेगी।

पूरे मामले का केंद्र एक सीमित और निगरानी वाली सुविधा की मांग है—जेल के भीतर बिना इंटरनेट वाले कंप्यूटर पर पहले से उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री देखना। दूसरी ओर, इमाम वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी है और इसी वजह से उसकी जेल में मौजूदगी के दौरान शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर यह कानूनी सवाल अदालत के सामने आया है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने केवल जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम 2 नवंबर की सुनवाई में सामने आएगा।