पाकिस्तान की मध्यस्थता से भारत का कद कम नहीं होगा: थरूर की अलग राय, आतंक पर सख्ती की दोहराई शर्त

पाकिस्तान की मध्यस्थता से भारत का कद कम नहीं होगा: थरूर की अलग राय, आतंक पर सख्ती की दोहराई शर्त

भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इस बहस के बीच अपनी अलग और संतुलित राय रखते हुए साफ किया है कि अगर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, तो इससे भारत की वैश्विक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत का पाकिस्तान को लेकर मूल रुख फिलहाल बदलने वाला नहीं है।

‘मध्यस्थता से भारत का कद नहीं घटता’

एक इंटरव्यू में शशि थरूर ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका के बीच किसी तरह की मध्यस्थता करने से भारत की साख पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, भारत की विदेश नीति अपने मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों और वैश्विक विश्वसनीयता पर आधारित है, जिसे किसी तीसरे देश की भूमिका से कम नहीं आंका जा सकता।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष अक्सर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है, खासकर पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर।

आतंकवाद पर सख्त रुख बरकरार

थरूर ने साफ किया कि भारत का पाकिस्तान के प्रति रवैया तब तक नहीं बदलेगा, जब तक वह अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद भी दोषियों को सजा नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए और ओसामा बिन लादेन के मामले का हवाला देते हुए ‘दोहरा चरित्र’ बताया।

भारत की कूटनीति: संयम और संतुलन

अमेरिका के साथ संबंधों पर बोलते हुए थरूर ने कहा कि भारत को अपनी कूटनीतिक भाषा और व्यवहार में संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक विवादित टिप्पणी का जिक्र करते हुए सलाह दी कि ऐसे बयानों को अनावश्यक तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए।

उनका मानना है कि भारत को अपनी कूटनीति को सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं से ऊपर रखकर दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

पुरानी नीति, नई बहस

भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता आया है कि “आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।” 2016 के उरी हमले और 2019 के पुलवामा हमले के बाद यह नीति और सख्त हुई है। भारत का रुख रहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं करता, तब तक रिश्तों में सुधार संभव नहीं है।

शशि थरूर के इस बयान ने एक बार फिर यह दिखाया है कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों के भीतर भी अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं। आम नागरिक के लिए यह बहस इसलिए अहम है क्योंकि इससे देश की सुरक्षा, वैश्विक छवि और कूटनीतिक दिशा सीधे प्रभावित होती है।