नई दिल्ली: विभिन्न राज्यों में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने Election Commission of India से कई अहम सवाल किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत आयोग को असीमित और बिना नियंत्रण की शक्तियाँ नहीं दी जा सकतीं।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि “जिस तरीके से आयोग उचित समझे” का अर्थ यह नहीं कि प्रक्रिया संविधान, प्राकृतिक न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों से बाहर हो।
कोर्ट के प्रमुख सवाल
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क्या चुनाव आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण में मौजूदा नियमों से हट सकता है?
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मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम-13 और फॉर्म-6 में निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद SIR के तहत 11 दस्तावेज माँगना कितना वैध है?
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क्या आयोग मान्य जन्म-स्थान और निवास से जुड़े दस्तावेजों को नज़रअंदाज़ कर सकता है?
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने फॉर्म-6 का हवाला देते हुए कहा कि उसमें दावे-आपत्तियों की स्पष्ट प्रक्रिया और दस्तावेजों की सूची दी गई है। ऐसे में दस्तावेजों की संख्या बढ़ाने पर सवाल खड़े होते हैं।
चुनाव आयोग का पक्ष
आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने धारा 21(2)(a) का हवाला देते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों में लिखित कारण दर्ज कर नियमों से अलग तरीके से भी पुनरीक्षण किया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि धारा 21(3) “उपधारा (2) के बावजूद” शब्दों से शुरू होती है, जिससे SIR एक स्वतंत्र शक्ति बनती है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि भले ही आयोग की व्याख्या मान ली जाए, लेकिन जब SIR से नागरिकों के अधिकार प्रभावित होते हों, तो प्रक्रिया कम से कम उतनी ही पारदर्शी होनी चाहिए जितनी सामान्य पुनरीक्षण में होती है। मतदाता सूची में बदलाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए निष्पक्षता और न्यायसंगत प्रक्रिया अनिवार्य है।
राकेश द्विवेदी ने जवाब में कहा कि आयोग संविधान के अनुच्छेद 14 (निष्पक्षता) और अनुच्छेद 326 (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) के सिद्धांतों की अनदेखी नहीं कर सकता और कोई भी शक्ति पूरी तरह अनियंत्रित नहीं हो सकती।
अगली सुनवाई
पीठ ने दोहराया कि “जिस तरीके में उचित समझे” का मतलब प्राकृतिक न्याय और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ जाना नहीं है। SIR की कार्यप्रणाली कानून और पारदर्शिता के अनुरूप होनी चाहिए।
मामले में आज दोपहर 2 बजे आगे की सुनवाई होगी।



