आवारा कुत्तों को लेकर सुनवाई के दौरान आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने से होने वाली मौतों और चोटों के मामलों में राज्य सरकारों को भारी मुआवजा देना होगा. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्ते प्रेमियों और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों पर भी इसकी जवाबदेही तय की जाएगी, अगर वो ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कुत्तों को अपने घर या परिसर में ही रखें. जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.
सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलीलें पेश कीं. दातार ने कहा कि 7 नवंबर का आदेश पूरी तरह वैधानिक और कानून समर्थित है. दातार ने कहा कि मामले में किसी विशेषज्ञ समिति के गठन की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि ABC नियम 60 से ज्यादा केंद्रीय और राज्य कानूनों के खिलाफ हैं. दातार ने वन्यजीव क्षेत्रों में आवारा कुत्तों से खतरे का मुद्दा उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 9 साल के बच्चे की मौत पर जिम्मेदारी किसकी होगी?



