TMC को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: मतगणना पर्यवेक्षक पर चुनाव आयोग को मिली पूरी छूट

TMC को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: मतगणना पर्यवेक्षक पर चुनाव आयोग को मिली पूरी छूट

पश्चिम बंगाल में मतगणना से ठीक पहले पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे से होकर साफ हो गया है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह अपने हिसाब से अधिकारियों की नियुक्ति करे। इस फैसले के साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उसने इस नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में चुनौती दी थी। यह फैसला सिर्फ एक कानूनी राय नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियंत्रण को लेकर भी एक स्पष्ट संकेत देता है। आम मतदाता के लिए इसका मतलब यह है कि चुनाव आयोग की भूमिका और भी मजबूत होकर सामने आई है।

TMC ने उठाए थे चार बड़े सवाल, कोर्ट ने नहीं माना

सुनवाई के दौरान TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चार मुख्य मुद्दे रखे। उनका कहना था कि जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को भेजे गए नोटिस की जानकारी पार्टी को देर से मिली। साथ ही, हर बूथ पर संभावित गड़बड़ी की आशंका जताई गई, लेकिन उसके पीछे ठोस आधार नहीं बताया गया। सिब्बल ने यह भी सवाल उठाया कि पहले से ही केंद्रीय अधिकारी सूक्ष्म पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद हैं, तो फिर एक और केंद्रीय अधिकारी की क्या जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि परिपत्र के मुताबिक राज्य सरकार के अधिकारी को भी शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का साफ रुख: ‘चुनाव आयोग स्वतंत्र है’

जस्टिस बागची की बेंच ने इन दलीलों पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों से सहमति लेने की कोई बाध्यता नहीं है। चुनाव आयोग अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर निर्णय ले सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच इस तरह का विभाजन जरूरी नहीं है। सभी सरकारी कर्मचारी ही हैं, और उनमें से चयन करना चुनाव आयोग का अधिकार है। अगर आयोग केवल एक समूह से अधिकारियों का चयन करता है, तो उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।

मतदाता और सिस्टम के लिए क्या मायने?

इस फैसले का सीधा असर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ता है। इससे यह संदेश जाता है कि चुनाव आयोग को संचालन में पर्याप्त स्वतंत्रता है, जिससे वह निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है। हालांकि, राजनीतिक दलों की आशंकाएं भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। लेकिन कोर्ट के इस रुख से यह साफ है कि चुनावी व्यवस्थाओं में अंतिम निर्णय आयोग का ही रहेगा। अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने TMC की याचिका को खारिज कर दिया और चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा। इससे अब बंगाल में मतगणना की प्रक्रिया बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे बढ़ सकेगी।